Chapter 9 · राजविद्याराजगुह्ययोग
Bhagavad Gita 9.2
मूल श्लोक :
राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्
प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम्Hindi Translation By Swami Ramsukhdas
यह सम्पूर्ण विद्याओंका और सम्पूर्ण गोपनीयोंका राजा है? यह अति पवित्र तथा अतिश्रेष्ठ है और इसका फल भी प्रत्यक्ष है। यह धर्ममय है? अविनाशी है और करनेमें बहुत सुगम है अर्थात् इसको प्राप्त करना बहुत सुगम है।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
धर्म शब्द का प्रचलित अर्थ यह है कि सप्ताह के किसी विशेष दिन? निर्धारित समय के लिए देवालय में जाकर व्रत पालन तथा पूजा करना आदि। इस दृष्टि से वेदान्त कोई धर्म नहीं है परन्तु आदर्श जीवन जीने की कला को धर्म समझने पर वेदान्त सर्वश्रेष्ठ धर्म है? क्योंकि उसमें आदर्श जीवन का वैज्ञानिक विश्लेषण एवं विवेचन किया गया है। राजविद्या? राजगुह्य? पवित्र और उत्तम कहकर भगवान् श्रीकृष्ण उसकी प्रशंसा करते हैं।कोई ज्ञान? राजविद्या और गुह्यतम तथा परम पवित्र होते हुए भी यदि अनुभव ग्राह्य नहीं है? तो उसका कोई उपयोग नहीं हो सकता। परन्तु इस ज्ञान में यह दोष नहीं है? क्योंकि यह प्रत्यक्षावगमम् अर्थात् इसका आत्मरूप में साक्षात् अनुभव किया जा सकता है।इसी प्रकार? यह ज्ञान र्धम्य अर्थात् धर्म के अनुकूल है? धर्मयुक्त है। धर्म शब्द का अर्थ अनेक स्थलों पर बताया जा चुका है। आत्मचैतन्य के अभाव में मनुष्य स्थूल और सूक्ष्मरूप जड़तत्त्वों का समूह मात्र है? जो स्वयं कोई भी कार्य करने में समर्थ नहीं है। यह चेतनतत्त्वआत्मा ही मनुष्य का वास्तविक धर्म है? स्वरूप है। भगवान् यहाँ जो ज्ञान प्रदान करने वाले हैं? वह न भौतिक विज्ञान है और न मनोविज्ञान किन्तु वह आत्मज्ञान अर्थात् मनुष्य के स्वस्वरूप का ज्ञान है।सुसुखं कर्तुम् धर्म कोई बाह्य जगत् में की जाने वाली क्रिया नहीं? वरन् आत्मिक उन्नति का मार्ग है? जिसका अनुसरण प्रत्येक व्यक्ति स्वयं ही करता है। यदि प्रस्तुत ज्ञान को प्राप्त करना अत्यन्त कठिन हो? तो उसमें किसी की प्रवृत्ति न होने से उसकी विद्यमानता व्यर्थ ही होगी। वैज्ञानिकों की इस घोषणा से कि मंगलग्रह पर सोने का अक्षय भण्डार वितरण के लिए उपलब्ध है? देश की दरिद्रता दूर नहीं होती भगवान् इस ज्ञान के कठिन होने के भय को साधक के मन से निवृत्त करने के लिए कहते हैं कि यह करने में अत्यन्त सरल है। लगनशील और योग्य विद्यार्थी के लिये चित्तशुद्धि और उसके द्वारा ज्ञान से लक्ष्यप्राप्ति करना अत्यन्त सरल कार्य है।करने में सरल होते हुए भी यदि इस ज्ञान का फल अनित्य और विनाशी हो? तो कोई भी बुद्धिमान पुरुष उसकी प्राप्ति के लिए प्रयत्न नहीं करेगा। किन्तु स्वयं भगवान् प्रमाणित करते हैं कि इस ज्ञान का फल अव्यय है आत्म साक्षात्कार का अर्थ है? स्वयं अनादिअनन्त आत्मा ही बन जाना? जो इस आभासिक दृश्यमान जगत् का एकमेव अद्वितीय अधिष्ठान है। इसलिए कहा गया है कि यह ज्ञान अव्यय है।ज्ञान के साधकों के विपरीत? जो लोग इस नित्य वस्तु के लिए प्रयत्न नहीं करते? उनके विषय में कहते हैं --
English Translation By Swami Sivananda
This is the kingl science, the kingly secret, the supreme purifier, realisable by direct intuitional knowledge, according to righteousness, very easy to perform and imperishable.
Transliteration
rājavidyā rājaguhyaṃ pavitramidamuttamam
pratyakṣāvagamaṃ dharmyaṃ susukhaṃ kartumavyayamअनुवाद
यह ज्ञान सब विद्याओं का राजा, सब गुप्त रखने योग्य विषयों का राजा, अति पवित्र और उत्तम है। यह प्रत्यक्ष फल देने वाला, धर्मयुक्त, साधन करने में अत्यंत सुगम और अविनाशी है।
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को उस परम ज्ञान की महिमा बता रहे हैं जिसे वे प्रकट करने जा रहे हैं। वे इसे ‘राजविद्या’ (विद्याओं का राजा) और ‘राजगुह्य’ (रहस्यों का राजा) कहते हैं क्योंकि यह आत्मा और परमात्मा का परम सत्य है। यह ज्ञान न केवल पवित्र और अविनाशी है, बल्कि इसका अनुभव प्रत्यक्ष रूप से किया जा सकता है और इसका आचरण करना अत्यंत सरल है।
Translation
This knowledge is the king of sciences, the king of secrets, the supreme purifier. It is realized by direct perception, endowed with righteousness, very easy to perform, and imperishable.
Meaning
In this verse, Lord Krishna extols the glory of the supreme knowledge He is about to impart. He terms it the ‘king of education’ and the ‘king of secrets’ because it deals with the ultimate truth of the soul and God. This knowledge is described as the ultimate purifier, directly realizable, aligned with dharma, joyful to practice, and eternal in its results.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| राजविद्या | विद्याओं का राजा (परम ज्ञान) |
| राजगुह्यम् | गोपनीय विषयों का राजा (परम रहस्य) |
| पवित्रम् | पवित्र करने वाला |
| इदम् | यह |
| उत्तमम् | सर्वश्रेष्ठ |
| प्रत्यक्ष | प्रत्यक्ष |
| अवगमम् | अनुभव योग्य |
| धर्म्यम् | धर्मयुक्त |
| सुसुखम् | अत्यंत सुगम (आनंदपूर्वक) |
| कर्तुम् | आचरण करने में |
| अव्ययम् | अविनाशी |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| rājavidyā | the king of education (supreme knowledge) |
| rājaguhyam | the king of secrets |
| pavitram | purifier |
| idam | this |
| uttamam | supreme |
| pratyakṣa | by direct perception |
| avagamam | understood |
| dharmyam | righteous |
| susukham | very easy / joyful |
| kartum | to practice |
| avyayam | imperishable |