Chapter 6 · आत्मसंयमयोग
Bhagavad Gita 6.34
मूल श्लोक :
चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्Hindi Translation By Swami Ramsukhdas
क्योंकि हे कृष्ण मन बड़ा ही चञ्चल प्रमथनशील दृढ़ (जिद्दी) और बलवान् है। उसका निग्रह करना मैं वायुकी तरह अत्यन्त कठिन मानता हूँ।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
आधुनिक विचारधारा का मनुष्य सभी पवित्र शास्त्रों की केवल निन्दा करता है जबकि एक जिज्ञासु साधक भी प्रत्येक शास्त्रोक्त कथन को अन्धविश्वास से स्वीकार नहीं कर लेता वरन् वह प्रश्न भी पूछता है। परन्तु आधुनिक व्यक्ति की निन्दा और जिज्ञासु द्वारा किये गये प्रश्न में जमीन आसमान का अन्तर है। जिज्ञासु का प्रयत्न होता है कि शास्त्र के तात्पर्य को पूर्ण रूप से समझे। अर्जुन अपने मन को सम्यक् प्रकार से जानता है कि वह अति चंचल प्रमथनधर्मी बलवान् और दृढ़ है।प्रमाथि बलवान् और दृढ़ ये तीन शब्द अत्यन्त महत्वपूर्ण और अर्थ गर्भित हैं। प्रमाथि शब्द से वृत्तिप्रवाह की द्रुत गति तथा उसके द्वारा उत्पन्न विक्षेपों की लहराती लहरें भी दर्शायी गयी हैं। अर्जुन कहता है कि यह मन प्रमाथि होने के साथसाथ बलवान् भी है। द्रुत गति का वृत्तिप्रवाह इष्ट विषय की ओर अग्रसर होते हुए उसे प्राप्त होने पर उस विषय के साथ दृढ़ आसक्ति से बंधकर इतना बलवान् हो जाता है कि उसे उस विषय से विलग करना दुष्कर कार्य हो जाता है। उसका तीसरा लक्षण है दृढ़ता अर्थात् एक बार यह स्वेच्छाचारी मन किसी विषय का चिन्तन प्रारम्भ कर दे तो उसे उससे परावृत्त करना सरल कार्य नहीं होता। इन लक्षणों से युक्त मन को किस प्रकार विषय पराङ्मुख करके आत्मा में स्थिर कर सकते हैं जैसा कि ध्यान विधि में बताया गया हैमन की शक्ति और गति भेदकता और व्यापकता को यहाँ प्रयुक्त वायु की उपमा से अधिक सुन्दर तथा प्रभावशाली शैली में व्यक्त नहीं किया जा सकता था। अर्जुन यहाँ श्रीकृष्ण से उन उपायों को जानना चाहता है जिनके द्वारा प्रचण्ड वायु के समान वेग वाले मन को पूर्णतया वश में किया जा सकता है। अर्जुन भगवान् को उनके अत्यन्त सुपरिचित नाम कृष्ण के द्वारा सम्बोधित करता है जो अत्यन्त उपयुक्त है क्योंकि कृष् धातु से कृष्ण शब्द बनता है जिसका अर्थ है जो आत्मानुभवी भक्तों के समस्त दोषों अर्थात् वासनाओं का कर्षण कर लेता है नष्ट कर देता है।स्वप्न में किसी की हत्या करने वाला स्वप्नद्रष्टा जैसे ही जाग्रत् अवस्था में आता है उसके रक्तरंजित हाथ और कलंक की कालिमा तत्काल ही स्वच्छ हो जाती हैं। इसी प्रकार जब आत्मा के वास्तविक रूप की पहचान हो जाती है तब मन और उसकी आक्रामक प्रवृत्तियाँ वासनाएं और उनकी दुष्टता बुद्धि और उसकी खोज की प्रवृत्ति शरीर और उसके भोग ये सभी नष्ट हो जाते हैं। इसके लिए दार्शनिक कवि महर्षि व्यासजी ने महाभारत में इस अन्तरात्मा का चित्रण वृन्दावन के मुरली मनोहर श्याम कृष्ण के रूप में किया है। प्रकरण के सन्दर्भ में किसी विशेष गुण को दर्शाने के लिए व्यक्ति को एक विशेष संज्ञा प्रदान करने की कला संस्कृत भाषा की अपनी विशेषता है जो विश्व की अन्य भाषाओं में नहीं मिलती।अर्जुन के तर्क को स्वीकार करते हुए भगवान् कहते हैं
English Translation By Swami Sivananda
The mind verily is restless, turbulent, strong and unyielding, O Krishna: I deem it as difficult to control it as to control the wind.
Transliteration
cañcalaṃ hi manaḥ kṛṣṇa pramāthi balavad dṛḍham
tasyāhaṃ nigrahaṃ manye vāyoriva suduṣkaramअनुवाद
हे कृष्ण! क्योंकि यह मन बड़ा चंचल, प्रमथनशील (मथ डालने वाला), अत्यंत बलवान् और दृढ़ है उसका वश में करना मैं वायु की भाँति अत्यंत कठिन मानता हूँ
भावार्थ
इस श्लोक में अर्जुन मन की चंचलता और उसकी अनियंत्रित प्रकृति के बारे में अपनी व्यावहारिक कठिनाई व्यक्त कर रहे हैं। वे मन की तुलना तीव्र आंधी या वायु से करते हैं, जिसे रोकना अत्यंत कठिन है। अर्जुन का यह प्रश्न मानव मन की सार्वभौमिक समस्या को दर्शाता है, जिसका समाधान आगे श्री कृष्ण देते हैं।
Translation
O Krishna, for the mind is restless, turbulent, powerful, and obstinate I deem its control to be as difficult as controlling the wind
Meaning
In this verse, Arjuna expresses his practical difficulty regarding the restless and uncontrollable nature of the mind. He compares the mind to a powerful wind, which is extremely difficult to curb or capture. Arjuna’s query highlights a universal human struggle, for which Sri Krishna provides a solution in the subsequent verses.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| चञ्चलम् | चंचल |
| ही | निश्चय ही |
| मनः | मन |
| कृष्ण | हे कृष्ण |
| प्रमाथि | मथ डालने वाला (विचलित करने वाला) |
| बलवत् | बलवान् |
| दृढम् | दृढ़ (हठी) |
| तस्य | उसका |
| अहम् | मैं |
| निग्रहम् | वश में करना (दमन) |
| मन्ये | मानता हूँ |
| वायोः | वायु को |
| इव | की भाँति |
| सु-दुष्करम् | अत्यंत कठिन |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| cañcalam | restless |
| hi | indeed |
| manaḥ | the mind |
| kṛṣṇa | O Krishna |
| pramāthi | turbulent |
| balavat | powerful |
| dṛḍham | obstinate |
| tasya | its |
| aham | I |
| nigraham | control |
| manye | think |
| vāyoḥ | of the wind |
| iva | like |
| su-duṣkaram | very difficult to do |