श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 4 · ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

Bhagavad Gita 4.3

मूल श्लोक :

स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है इसलिये वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझसे कहा है क्योंकि यह बड़ा उत्तम रहस्य है।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

यहाँ भगवान् अब तक के उपदिष्ट ज्ञान के प्राचीनता की घोषणा करके रूढ़िवादी विचारकों की शंका का निर्मूलन कर देते हैं।शिष्य के प्रति स्नेह भाव होने पर ही कोई गुरु उत्साह और कुशलता पूर्वक उपदेश दे सकता है। श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच ऐसा ही सम्बन्ध था और भगवान् को यह विश्वास था कि उनके द्वारा निर्दिष्ट मार्ग का वह अनुसरण करेगा। गुरु और शिष्य के बीच इस प्रकार की व्यापारिक व्यवस्था न हो कि तुम शुल्क दो और मैं पढ़ाऊँगा। प्रेम और स्वातन्त्र्य मित्रता और आपसी समझ के वातावरण में ही मन और बुद्धि विकसित होकर खिल उठते हैं। आत्मानुभव का ज्ञान प्रदान करने के लिए आवश्यक गुणों को अर्जुन में देखकर ही श्रीकृष्ण कहते हैं कि उन्होंने इस योग का ज्ञान उसे दिया।यहाँ इस ज्ञान को रहस्य कहने का तात्पर्य केवल इतना ही है कि कोई व्यक्ति कितना ही बुद्धिमान् क्यों न हो फिर भी अनुभवी पुरुष के उपदेश के बिना वह आत्मा के अस्तित्व का कभी आभास भी नहीं पा सकता। समस्त बुद्धि वृत्तियों को प्रकाशित करने वाली आत्मा स्वयं बुद्धि के परे होती है। इसलिये मनुष्य की विवेक सार्मथ्य कभी भी नित्य अविकारी आत्मा को विषय रूप में नहीं जान सकती। यही कारण है कि सत्य के विज्ञान को यहाँ उत्तम रहस्य कहा गया है।किसी के मन में यह शंका न रह जाये कि भगवान् के वाक्यों में परस्पर विरोध है इसलिये अर्जुन मानो आक्षेप करता हुआ प्रश्न पूछता है

English Translation By Swami Sivananda

That same ancient Yoga has been today taught to thee by Me, for thou art My devotee and My friend; it is the supreme secret.

Transliteration

sa evāyaṃ mayā te'dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥ
bhakto'si me sakhā ceti rahasyaṃ hyetaduttamam

अनुवाद

वही यह प्राचीन योग आज मेरे द्वारा तुमसे कहा गया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो; यह निश्चय ही एक उत्तम रहस्य है।

भावार्थ

भगवान कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि जो ज्ञान उन्होंने सृष्टि के आरंभ में सूर्यदेव को दिया था, वही प्राचीन योग वे आज अर्जुन को दे रहे हैं। इसका कारण यह है कि अर्जुन उनके अनन्य भक्त और प्रिय मित्र हैं। यह आध्यात्मिक ज्ञान एक परम रहस्य है, जिसे केवल भगवान के प्रति भक्ति और प्रेम के माध्यम से ही समझा जा सकता है।

Translation

That very same ancient yoga has been declared to you by Me today, for you are My devotee and friend; this is indeed a supreme secret.

Meaning

Lord Krishna tells Arjuna that He is revealing the very same ancient science of yoga that He originally taught to the sun god. He chooses Arjuna to receive this knowledge because Arjuna is His devoted disciple and dear friend. This spiritual wisdom is a supreme secret, which can only be truly understood through devotion and a loving relationship with the Divine.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
सःवह
एवही
अयम्यह
मयामेरे द्वारा
तेतुमसे
अद्यआज
योगःयोग
प्रोक्तःकहा गया है
पुरातनःप्राचीन
भक्तःभक्त
असिहो
मेमेरे
सखामित्र
चऔर
इतिइसलिए
रहस्यम्रहस्य
हिनिश्चय ही
एतत्यह
उत्तमम्उत्तम

Word by word

WordMeaning
saḥthat
evacertainly
ayamthis
mayāby Me
teto you
adyatoday
yogaḥyoga
proktaḥdeclared
purātanaḥancient
bhaktaḥdevotee
asiyou are
meMy
sakhāfriend
caand
itithus
rahasyamsecret
hicertainly
etatthis
uttamamsupreme