Chapter 4 · ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
Bhagavad Gita 4.2
मूल श्लोक :
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तपHindi Translation By Swami Ramsukhdas
हे परंतप इस तरह परम्परासे प्राप्त इस योगको राजर्षियोंने जाना। परन्तु बहुत समय बीत जानेके कारण वह योग इस मनुष्यलोकमें लुप्तप्राय हो गया।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
वेदों में प्रवृत्ति और निवृत्ति मार्गों का उपदेश है। इस योग का परम्परागत रूप से राजर्षियों को ज्ञान था परन्तु लगता है इस योग का भी अपना दुर्भाग्य और सौभाग्य है इतिहास के किसी काल में मानव मात्र की सेवा के लिये यह ज्ञान उपलब्ध होता है और किसी अन्य समय अनुपयोगी सा बनकर निरर्थक हो जाता है तब अध्यात्म का स्वर्ण युग समाप्त होकर भोगप्रधान आसुरी जीवन का अन्धा युग प्रारम्भ होता है किन्तु आसुरी भौतिकवाद से ग्रस्त काल में भी वह पीढ़ी अपने ही अवगुणों से पीड़ित होने के लिये उपेक्षित नहीं रखी जाती। क्योंकि उस समय कोई महान् गुरु अध्यात्म क्षितिज पर अवतीर्ण होकर तत्कालीन पीढ़ी को प्रेरणा साहस उत्स्ााह और आवश्यक नेतृत्व प्रदान करके दुख पूर्ण पगडंडी से बाहर सांस्कृतिक पुनरुत्थान के राजमार्ग पर ले आता है।महाभारत काल का उचित मूल्यांकन करते हुए श्रीकृष्ण भगवान् ठीक ही कहते हैं कि दीर्घकाल के अन्तराल से वह योग यहाँ नष्ट हो गया है।यह देखकर कि इन्द्रिय संयम से रहित दुर्बल व्यक्तियों के हाथों में जाकर यह योग नष्टप्राय हो गया जिसके बिना जीवन का परम् पुरुषार्थ प्राप्त नहीं किया जा सकता। भगवान् आगे कहते हैं
English Translation By Swami Sivananda
This, handed down thus in regular succession, the royal sages knew. This Yoga, by long lapse of time, has been lost here, O Parantapa (burner of the foes).
Transliteration
evaṃ paramparāprāptamimaṃ rājarṣayo viduḥ
sa kāleneha mahatā yogo naṣṭaḥ parantapaअनुवाद
हे परन्तप! इस प्रकार परम्परा से प्राप्त इस योग को राजर्षियों ने जाना। किन्तु बहुत समय बीत जाने के कारण वह योग इस लोक में लुप्त हो गया।
भावार्थ
भगवान कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि यह निष्काम कर्मयोग का ज्ञान एक गुरु-शिष्य परम्परा के माध्यम से आगे बढ़ा। प्राचीन काल के पवित्र और ज्ञानी राजाओं (राजर्षियों) ने इसी परम्परा से इसे समझा और अपने जीवन में उतारा। परन्तु समय के लम्बे अन्तराल में यह पवित्र ज्ञान इस संसार से लगभग लुप्त हो गया।
Translation
O subduer of enemies, the saintly kings understood this yoga received thus through disciplic succession. But in the course of great time, that yoga was lost in this world.
Meaning
Lord Krishna explains to Arjuna that this supreme science of yoga was passed down through a continuous disciplic succession. The saintly kings of ancient times understood and practiced it by receiving it through this unbroken chain. However, over a long period of time, this sacred knowledge was gradually lost to the world.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| एवम् | इस प्रकार |
| परम्पराप्राप्तम् | परम्परा से प्राप्त |
| इमम् | इस |
| राजर्षयः | राजर्षियों ने |
| विदुः | जाना |
| सः | वह |
| कालेन | समय के प्रभाव से |
| इह | इस संसार में |
| महता | महान (लम्बे) |
| योगः | योग |
| नष्टः | लुप्त हो गया |
| परन्तप | हे शत्रुओं को तपाने वाले |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| evam | thus |
| paramparāprāptam | received through disciplic succession |
| imam | this |
| rājarṣayaḥ | the saintly kings |
| viduḥ | understood |
| saḥ | that |
| kālena | by the course of time |
| iha | in this world |
| mahatā | great |
| yogaḥ | yoga |
| naṣṭaḥ | lost |
| parantapa | O subduer of enemies |