Chapter 3 · कर्मयोग
Bhagavad Gita 3.42
मूल श्लोक :
इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सःHindi Translation By Swami Ramsukhdas
इन्द्रियोंको (स्थूलशरीरसे) पर (श्रेष्ठ सबल प्रकाशक व्यापक तथा सूक्ष्म) कहते हैं। इन्द्रियोंसे पर मन है मनसे भी पर बुद्धि है औऱ जो बुद्धिसे भी पर है वह (काम) है। इस तरह बुद्धिसे पर(काम) को जानकर अपने द्वारा अपनेआपको वशमें करके हे महाबाहो तू इस कामरूप दुर्जय शत्रुको मार डाल।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
तृतीय अध्याय के अन्तिम दो श्लोकों में व्यास जी ने उस परिपूर्ण साधना की ओर संकेत किया है जिसके अभ्यास से कोई भी साधक सफलतापूर्वक अपने शत्रु काम को खोजकर उसका नाश कर सकता है।यद्यपि भगवद्गीता के प्रारम्भ के अध्यायों में ही हम ध्यानविधि के विस्तृत विवेचन की अपेक्षा नहीं कर सकते फिर भी इन श्लोकों में भगवान् आत्मप्राप्ति के उपाय रूप ध्यानविधि की रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं।बाह्य जगत् की वस्तुओं की तुलना में हमारे लिए अपनी इन्द्रियाँ अधिक महत्त्व की होती हैं। कर्मेन्द्रियों की अपेक्षा ज्ञानेन्द्रियाँ अधिक श्रेष्ठ और सूक्ष्म हैं। हमारा सबका अनुभव है कि मन ही इन्द्रियों को नियन्त्रित करता है अत यहाँ मन को इन्द्रियों से सूक्ष्म और परे कहा गया है।निसन्देह मन के विचरण का क्षेत्र पर्याप्त विस्तृत है फिर भी उसकी अपनी सीमाएँ हैं। एक ज्ञान के पश्चात् अन्य ज्ञान को प्राप्त कर हम अपने मन की सीमा बढ़ाते हैं और विजय के इस अभियान में बुद्धि ही सर्वप्रथम मन के वर्तमान ज्ञान की सीमा रेखा को पार करके उसके लिए ज्ञान के नये राज्यों को विजित करती है। इस दृष्टि से बुद्धि की व्यापकता और भी अधिक विस्तृत है इसलिए बुद्धि को मन से श्रेष्ठतर कहा गया है। जो बुद्धि के भी परे तत्त्व है उसे ही आत्मा कहते हैं।बुद्धिवृत्तियों को प्रकाशित करने वाला चैतन्य बुद्धि से भी सूक्ष्म होना ही चाहिये। उपनिषदों में कहा गया है कि इस चैतन्यस्वरूप आत्मा के परे और कुछ नहीं है। ध्यानसाधनामें शरीर मन और बुद्धि उपाधियों से अपने तादात्म्य को हटाकर आत्मस्वरूप में स्थित होने का सजग प्रयत्न किया जाता है। ये सभी प्रयत्न तब समाप्त हो जाते हैं जब सब मिथ्या वस्तुओं की ओर से अपना ध्यान हटाकर हम निर्विषय चैतन्यस्वरूप बनकर स्थित हो जाते हैं।भगवान् आगे कहते हैं
English Translation By Swami Sivananda
They say that the senses are superior (to the body); superior to the senses is the mind; superior to the mind is the intellect; one who is superior even to the intellect is He (the Self).
Transliteration
indriyāṇi parāṇyāhurindriyebhyaḥ paraṃ manaḥ
manasastu parā buddhiryo buddheḥ paratastu saḥअनुवाद
विद्वान कहते हैं कि स्थूल शरीर से इन्द्रियाँ श्रेष्ठ हैं; इन्द्रियों से श्रेष्ठ मन है; मन से श्रेष्ठ बुद्धि है; परन्तु जो बुद्धि से भी श्रेष्ठ है, वह आत्मा है।
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को काम (वासना) पर विजय प्राप्त करने के लिए मानव शरीर के विभिन्न स्तरों का क्रम समझाते हैं। स्थूल शरीर से इन्द्रियाँ श्रेष्ठ हैं, इन्द्रियों से मन श्रेष्ठ है, और मन से बुद्धि श्रेष्ठ है। परन्तु जो बुद्धि से भी परे और सर्वोच्च है, वह हमारी वास्तविक पहचान यानी आत्मा है, जिसे जानकर सभी वासनाओं को नष्ट किया जा सकता है।
Translation
They say that the senses are superior to the body; superior to the senses is the mind; superior to the mind is the intellect; but that which is superior to the intellect is He (the Self).
Meaning
In this verse, Lord Krishna explains the hierarchy of the human faculties to help Arjuna conquer desire. The physical senses are superior to the gross body, the mind controls the senses, and the intellect guides the mind. However, the true Self (Atman) is supreme and transcends even the intellect, meaning that by realizing the Self, one can overcome all lower desires.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| इन्द्रियाणि | इन्द्रियों को |
| पराणि | श्रेष्ठ |
| आहुः | कहते हैं |
| इन्द्रियेभ्यः | इन्द्रियों से |
| परम् | श्रेष्ठ |
| मनः | मन |
| मनसः | मन से |
| तु | परन्तु |
| परा | श्रेष्ठ |
| बुद्धिः | बुद्धि |
| यः | जो |
| बुद्धेः | बुद्धि से |
| परतः | परे (श्रेष्ठ) |
| तु | और |
| सः | वह (आत्मा) |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| indriyāṇi | the senses |
| parāṇi | superior |
| āhuḥ | they say |
| indriyebhyaḥ | than the senses |
| param | superior |
| manaḥ | the mind |
| manasaḥ | than the mind |
| tu | but |
| parā | superior |
| buddhiḥ | the intellect |
| yaḥ | that which |
| buddheḥ | than the intellect |
| parataḥ | superior |
| tu | and |
| saḥ | He (the Self) |