श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 3 · कर्मयोग

Bhagavad Gita 3.40

मूल श्लोक :

इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते
एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम्

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

इन्द्रियाँ मन और बुद्धि इस कामके वासस्थान कहे गये हैं। यह काम इन(इन्द्रियाँ मन और बुद्धि) के द्वारा ज्ञानको ढककर देहाभिमानी मनुष्यको मोहित करता है।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

मन की शान्ति और सन्तोष को लूट ले जाने वाले शत्रु काम के पहचाने जाने पर एक सैनिक के समान राजकुमार अर्जुन की अपने शत्रु के निवास स्थान के विषय में जानने की इच्छा थी। अध्यात्म के उपदेशक के रूप में भगवान् को यह बताना आवश्यक था कि यह काम कौन से स्थान पर रहकर अपनी अत्यन्त दुष्ट योजनाएँ बनाता है। कामना का निवास स्थान है इन्द्रियाँ मन और बुद्धि।बड़े विस्तृत क्षेत्र में अपराध करने वाले दस्यु दल के सरदार के एक से अधिक रहने के स्थान होते हैं जहाँ से वह पूरे दल का संचालन करता है। यहाँ भी कामनारूप शत्रु के स्थानों का स्पष्ट निर्देश किया गया है।बिना किसी नियन्त्रण एवं संयम के इन्द्रियां यदि विषयों में संचार करती हैं तो वे इच्छा के निवास के लिए प्रथम उपयुक्त स्थान हैं। इन्द्रियों के माध्यम से विषय की संवेदनाएँ मन में पहुंचने पर वह भी कामनाजन्य दुखों की उत्पत्ति के लिए उपयुक्त क्षेत्र का कार्य करता है। और अन्त में पूर्व विषयोपभोग की स्मृति से रंजित आसक्तियों से युक्त बुद्धि कामना का तीसरा सुरक्षित वासस्थान है।अविद्या से मोहित जीव शरीर के साथ तादात्म्य करके विषयोपभोग चाहता है। अविवेकपूर्वक मन और बुद्धि के साथ तादात्म्य करके भावनाओं एवं विचारों की सन्तुष्टि की वह इच्छा करता है।इन स्थानों पर इच्छा को खोजना माने शत्रु का सामना करना है। अन्त में शत्रु नाश कैसे करना है इसका वर्णन आगे के श्लोकों में किया गया है

English Translation By Swami Sivananda

The senses, the mind and the intellect are said to be its seat; through these it deludes the embodied by veiling his wisdom.

Transliteration

indriyāṇi mano buddhirasyādhiṣṭhānamucyate
etairvimohayatyeṣa jñānamāvṛtya dehinam

अनुवाद

इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि इसके (काम के) निवास स्थान कहे जाते हैं। इनके द्वारा यह (काम) ज्ञान को आच्छादित करके देहधारी जीवात्मा को मोहित करता है।

भावार्थ

इस श्लोक में भगवान कृष्ण बताते हैं कि काम (वासना) मनुष्य के भीतर कहाँ निवास करता है। इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि इस काम के मुख्य निवास स्थान हैं। इन स्थानों पर कब्ज़ा करके काम मनुष्य के वास्तविक ज्ञान को ढक देता है और जीवात्मा को मोह में डाल देता है।

Translation

The senses, the mind, and the intelligence are said to be its sitting place. Through these, it covers the real knowledge and deludes the embodied soul.

Meaning

In this verse, Lord Krishna identifies the strategic locations where lust resides within the human body. By occupying the senses, mind, and intelligence, lust clouds a person’s true knowledge. Once the discriminative power is covered, it easily deludes the embodied soul into material entanglement.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
इन्द्रियाणिइन्द्रियाँ
मनःमन
बुद्धिःबुद्धि
अस्यइसका
अधिष्ठानम्निवास स्थान
उच्यतेकहा जाता है
एतैःइनके द्वारा
विमोहयतिमोहित करता है
एषःयह
ज्ञानम्ज्ञान को
आवृत्यढककर
देहिनम्देहधारी को

Word by word

WordMeaning
indriyāṇithe senses
manaḥthe mind
buddhiḥthe intelligence
asyaof this
adhiṣṭhānamsitting place
ucyateis called
etaiḥby these
vimohayatideludes
eṣaḥthis
jñānamknowledge
āvṛtyacovering
dehinamthe embodied soul