Chapter 3 · कर्मयोग
Bhagavad Gita 3.38
मूल श्लोक :
धूमेनाव्रियते वह्निर्यथाऽऽदर्शो मलेन च
यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम्Hindi Translation By Swami Ramsukhdas
जैसे धुएँसे अग्नि और मैलसे दर्पण ढक जाता है तथा जैसे जेरसे गर्भ ढका रहता है ऐसे ही उस कामके द्वारा यह ज्ञान (विवेक) ढका हुआ है।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
यहाँ तीन दृष्टान्त यह समझाने के लिये दिये गये हैं कि किस प्रकार काम और क्रोध हमारे विचार की सार्मथ्य को आवृत कर देते हैं। शास्त्रों में इसे पुनरुक्ति दोष माना गया है। किन्तु गीता में यह दोष नहीं मिलता। भगवद्गीता में कहीं पर भी अनावश्यक या निरर्थक पुनरुक्ति नहीं है। इसे ध्यान में रखकर इस श्लोक को समझने का प्रयत्न करें तो ज्ञात होगा कि यहाँ दिये तीनों दृष्टान्तों में सूक्ष्म भेद है। वाच्यार्थ से कहीं अधिक अर्थ इस श्लोक में बताया गया है।जगत् की अनित्य वस्तुओं के साथ आसक्ति के कारण मनुष्य की विवेचन सार्मथ्य आच्छादित हो जाती है। हमारी आसक्तियाँ अथवा इच्छाएँ तीन भागों में विभाजित की जा सकती हैं। अत्यन्त निम्न स्तर की इच्छाएँ मुख्यत शारीरिक उपभोगों के लिये दूसरे हमारी महत्त्वाकांक्षाएँ हो सकती हैं सत्ता धन प्रसिद्धि और कीर्ति पाने के लिये। इनसे भिन्न तीसरी इच्छा हो सकती है आत्मविकास और आत्मसाक्षात्कार की। ये तीन प्रकार की इच्छाएँ गुणों के प्राधान्य से क्रमश तामसिक राजसिक और सात्त्विक कहलाती हैं। तीन दृष्टान्तों के द्वारा इन तीन प्रकार की इच्छाओं से उत्पन्न विभिन्न प्रकार के आवरणों को स्पष्ट किया गया है।जैसे धुयें से अग्नि अनेक बार धुयें से अग्नि की चमकती ज्वाला पूर्णत या अंशत आवृत हो जाती है। इसी प्रकार सात्त्विक इच्छाएँ भी अनन्त स्वरूप आत्मा के प्रकाश को आवृत सी कर लेती हैं।जैसे धूलि से दर्पण रजोगुण से उत्पन्न विक्षेपों के कारण बुद्धि पर पड़े आवरण को इस उदाहरण के द्वारा स्पष्ट किया गया है। धुएँ के आवरण की अपेक्षा दर्पण पर पड़े धूलि को दूर करने के लिये अधिक प्रयत्न की आवश्यकता होती है। बहते हुये वायु के एक हल्के से झोंके से ही धुआँ हट जाता है जबकि तूफान के द्वारा भी दर्पण स्वच्छ नहीं किया जा सकता। केवल एक स्वच्छ सूखे कपड़े से पोंछकर ही उसे स्वच्छ करना सम्भव है। धुँए के होने पर भी कुछ मात्रा में अग्नि दिखाई पड़ती है परन्तु धूलि की मोटी परत जमी हुई होने पर दर्पण में प्रतिबिम्ब बिल्कुल नहीं दिखाई पड़ता।जैसे गर्भाशय से भ्रूण तमोगुण जनित अत्यन्त निम्न पशु जैसी वैषयिक कामनाएँ दिव्य स्वरूप को पूर्णत आवृत कर देती हैं जिसे समझने के लिए यह भ्रूण का दृष्टांत दिया गया है। गर्भस्थ शिशु पूरी तरह आच्छादित रहता है और उसके जन्म के पूर्व उसे देखना संभव भी नहीं होता। यहाँ आवरण पूर्ण है और उसके दूर होने के लिये कुछ निश्चित काल की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार तामसिक इच्छाओं से उत्पन्न बुद्धि पर के आवरण को हटाने के लिए जीव को विकास की सीढ़ी पर चढ़ते हुए दीर्घकाल तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।इस प्रकार इन भिन्नभिन्न प्रकार की इच्छाओं से उत्पन्न विभिन्न तारतम्य में अनुभव में आने वाले आवरणों को स्पष्ट किया गया है।इस श्लोक में केवल सर्वनामों का उपयोग करके कहा गया है कि उसके द्वारा यह आवृत है। अब अगले श्लोक में इन दोनों सर्वनामों उसके द्वारा और यह को स्पष्ट किया गया है
English Translation By Swami Sivananda
As fire is enveloped by smoke, as a mirror by dust, and as an embryo by the amnion, so is this enveloped by that.
Transliteration
dhūmenāvriyate vahniryathā''darśo malena ca
yatholbenāvṛto garbhastathā tenedamāvṛtamअनुवाद
जिस प्रकार धुएं से आग, और मैल से दर्पण ढका रहता है, तथा जिस प्रकार गर्भाशय से भ्रूण ढका रहता है, उसी प्रकार उस (काम) के द्वारा यह (ज्ञान) ढका रहता है।
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण समझाते हैं कि काम (वासना) किस प्रकार मनुष्य के ज्ञान को आच्छादित कर लेता है। उन्होंने तीन उदाहरण दिए हैं: धुएं से ढकी आग, मैल से ढका दर्पण और गर्भाशय से ढका भ्रूण। ये तीनों आवरण काम की विभिन्न तीव्रताओं को दर्शाते हैं, जो जीवात्मा की शुद्ध चेतना को ढक लेते हैं।
Translation
Just as fire is covered by smoke, and a mirror by dirt, and just as an embryo is covered by the womb, similarly this (knowledge) is covered by that (lust).
Meaning
In this verse, Lord Krishna explains how lust covers a person’s knowledge. He gives three analogies: fire covered by smoke, a mirror covered by dirt, and an embryo covered by the womb. These three coverings represent different degrees of lust that obscure the pure consciousness of the living entity.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| धूमेन | धुएं से |
| आव्रियते | ढका रहता है |
| वह्निः | आग |
| यथा | जिस प्रकार |
| आदर्शः | दर्पण |
| मलेन | मैल से |
| च | और |
| यथा | जिस प्रकार |
| उल्बेन | गर्भाशय से |
| आवृतः | ढका रहता है |
| गर्भः | भ्रूण |
| तथा | उसी प्रकार |
| तेन | उसके द्वारा |
| इदम् | यह |
| आवृतम् | ढका हुआ है |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| dhūmena | by smoke |
| āvriyate | is covered |
| vahniḥ | fire |
| yathā | just as |
| ādarśaḥ | mirror |
| malena | by dirt |
| ca | and |
| yathā | just as |
| ulbena | by the womb |
| āvṛtaḥ | is covered |
| garbhaḥ | embryo |
| tathā | similarly |
| tena | by that |
| idam | this |
| āvṛtam | is covered |