श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 3 · कर्मयोग

Bhagavad Gita 3.20

मूल श्लोक :

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः
लोकसंग्रहमेवापि संपश्यन्कर्तुमर्हसि

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

राजा जनकजैसे अनेक महापुरुष भी कर्मके द्वारा ही परमसिद्धिको प्राप्त हुए हैं। इसलिये लोकसंग्रहको देखते हुए भी तू (निष्कामभावसे) कर्म करनेके योग्य है।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

प्राचीन काल में जनक और अश्वपति आदि ज्ञानी राजाओं ने भी कर्म द्वारा संसिद्धि प्राप्त की थी। कर्मयोग के द्वारा सम्यक् ज्ञानपूर्वक अनासक्ति और अर्पण की भावना से कर्म करते हुए वे बन्धनों से मुक्त हो गये। सेवा के पवित्र जीवन को जी कर जगत् के लिये उन्होंने एक आदर्श स्थापित किया।श्रीकृष्ण का कहना है कि अर्जुन पर भी जन्मजात राजकुमार होने के कारण प्रजा तथा धर्म के रक्षण का उत्तरदायित्व था जिसका निर्वाह करना उसका कर्तव्य था। प्रारब्धवशात् आसन्न युद्ध से पलायन न करके कर्तव्य का सम्मान करते हुए उसको कुशलतापूर्वक युद्ध करना चाहिए। उसकी बन्धनकारक वासनाओं के क्षय का एक मात्र यही उपाय था। राजपरिवार में जन्म लेने के कारण सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा अर्जुन पर समाज रक्षण का उत्तरदायित्व अधिक था। इसलिए उस समय उसे युद्ध रूप कर्तव्य का निर्वाह करना अत्यावश्यक था।मरुस्थल में लता उत्पन्न नहीं होती। प्रकृति के नियमानुसार प्रत्येक प्राणी अपने लिए अनुकूल वातावरण में ही स्वयं को उपयुक्त पाता है। इस दृष्टि से अर्जुन का जन्म क्षत्रिय राज परिवार में हुआ तो स्वाभाविक है वही उसके लिये अनुकूल रहा होगा। संकटों और शत्रुओं का साहसपूर्वक सामना करने और समाज में शांति और विकास के लिये प्रयत्न करने के जीवन के लिए वह योग्य था।लोक संग्रह क्यों करना चाहिये  इसका उत्तर है

English Translation By Swami Sivananda

Janaka and others attained perfection verily by action only; even with a view to the protection of the masses thou shouldst perform action.

Transliteration

karmaṇaiva hi saṃsiddhimāsthitā janakādayaḥ
lokasaṃgrahamevāpi saṃpaśyankartumarhasi

अनुवाद

जनक आदि राजाओं ने कर्म के द्वारा ही परम सिद्धि प्राप्त की थी। लोक-कल्याण को देखते हुए भी तुम्हें कर्म करना ही उचित है।

भावार्थ

भगवान कृष्ण राजा जनक का ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताते हैं कि सांसारिक कर्तव्यों का त्याग किए बिना भी पूर्णता प्राप्त की जा सकती है। जनक और अन्य ज्ञानी राजाओं ने विश्व के कल्याण के लिए निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का पालन किया था। इसलिए, अर्जुन को भी सामान्य लोगों के लिए एक अच्छा आदर्श प्रस्तुत करने के लिए अपने निर्धारित कर्म करने चाहिए।

Translation

Kings like Janaka and others attained perfection solely through action. Even with a view to the welfare of the world, you should perform action.

Meaning

Lord Krishna gives the historical example of King Janaka to prove that perfection can be attained without renouncing worldly duties. Janaka and other enlightened kings performed their duties selflessly for the welfare of the world. Therefore, Arjuna should also perform his prescribed duties to set a good example for the common people.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
कर्मणाकर्म के द्वारा
एवही
हिनिश्चय ही
संसिद्धिम्सिद्धि को
आस्थिताःप्राप्त हुए
जनकादयःजनक आदि
लोकसंग्रहम्लोक-कल्याण को
एवही
अपिभी
संपश्यन्देखते हुए
कर्तुम्करने के
अर्हसितुम योग्य हो

Word by word

WordMeaning
karmaṇāby action
evaonly
hicertainly
saṃsiddhimperfection
āsthitāḥattained
janakādayaḥJanaka and others
lokasaṃgrahamthe welfare of the world
evaonly
apialso
saṃpaśyanconsidering
kartumto perform
arhasiyou ought