श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 2 · सांख्ययोग

Bhagavad Gita 2.32

मूल श्लोक :

यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम्
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम्

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

अपनेआप प्राप्त हुआ युद्ध खुला हुआ स्वर्गका दरवाजा है। हे पृथानन्दन वे क्षत्रिय बड़े सुखी हैं जिनको ऐसा युद्ध प्राप्त होता है।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

क्षत्रिय शब्द का तात्पर्य यहाँ जन्म से निश्चित की हुई क्षत्रिय जाति से नहीं है। यह व्यक्ति के मन की कतिपय विशिष्ट वासनाओं की ओर संकेत करता है। क्षत्रिय प्रवृति का व्यक्ति वह है जिसमें सार्मथ्य और उत्साह का ऐसा उफान हो कि वह दुर्बल और दरिद्र लोगों की रक्षा के साथ संस्कृति के शत्रुओं से राष्ट्र का रक्षण कर सके। हिन्दू नीतिशास्त्र के अनुसार ऐसे नेतृत्व के गुणों से सम्पन्न व्यक्ति को स्वयं ही संस्कृति का विनाशक और आक्रमणकारी नहीं होना चाहिये। किन्तु अधर्म का प्रतिकार न करने की कायरतापूर्ण भावना भी हिन्दुओं की परम्परा नहीं है। जब भी कभी ऐसा सुअवसर प्राप्त हो तो क्षत्रियों का कर्तव्य है कि वे इसे स्वर्ण अवसर समझ कर राष्ट्र का रक्षण करें। इस प्रकार के धर्मयुद्ध स्वर्ग की प्राप्ति के लिए खुले हुए द्वार के समान होते हैं।यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि भगवान् श्रीकृष्ण अपने तर्क प्रस्तुत करते हुए वेदान्त के सर्वोच्च सिद्धांत से उतर कर भौतिकवादियों के स्तर पर आये और उससे भी नीचे के स्तर पर आकर वे जगत् के एक सामान्य व्यक्ति के दृष्टिकोण से भी परिस्थिति का परीक्षण करते हैं। इन विभिन्न दृष्टिकोणों से वे अर्जुन को यह सिद्ध कर दिखाते हैं कि उसका युद्ध करना उचित है।निश्चय ही युद्ध करना तुम्हारा कर्तव्य है और अब यदि इसे छोड़कर तुम भागते हो तब

English Translation By Swami Sivananda

Happy are the Kshatriyas, O Arjuna! who are called upon to fight in such a battle that comes of itself as an open door to heaven.

Transliteration

yadṛcchayā copapannaṃ svargadvāramapāvṛtam
sukhinaḥ kṣatriyāḥ pārtha labhante yuddhamīdṛśam

अनुवाद

हे पार्थ! वे क्षत्रिय भाग्यशाली हैं, जिन्हें अपने आप प्राप्त हुआ और स्वर्ग के खुले द्वार के समान ऐसा युद्ध प्राप्त होता है।

भावार्थ

श्रीकृष्ण अर्जुन को उनके क्षत्रिय धर्म का स्मरण कराते हुए युद्ध के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे समझाते हैं कि बिना मांगे अपने आप प्राप्त हुआ धर्मयुद्ध एक दुर्लभ अवसर है, जो सीधे स्वर्ग के द्वार खोल देता है। इसलिए, केवल अत्यंत भाग्यशाली क्षत्रियों को ही ऐसे महान युद्ध में भाग लेने का अवसर मिलता है।

Translation

O Partha, fortunate are the kshatriyas who obtain such a war, which has come of its own accord as an open door to heaven.

Meaning

Krishna continues to persuade Arjuna to fight by appealing to his warrior duty. He explains that a righteous war, which arrives unsought, is a rare opportunity that directly opens the gates of heaven. Therefore, only the most fortunate warriors get the chance to participate in such a glorious battle.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
यदृच्छयाअपने आप (बिना मांगे)
और
उपपन्नम्प्राप्त हुआ
स्वर्गद्वारम्स्वर्ग का द्वार
अपावृतम्खुला हुआ
सुखिनःभाग्यशाली
क्षत्रियाःक्षत्रिय
पार्थहे पृथापुत्र (अर्जुन)
लभन्तेप्राप्त करते हैं
युद्धम्युद्ध
ईदृशम्ऐसा

Word by word

WordMeaning
yadṛcchayāby its own accord
caand
upapannamarrived
svargadvāramthe door to heaven
apāvṛtamwide open
sukhinaḥfortunate
kṣatriyāḥwarriors (kshatriyas)
pārthaO son of Pritha (Arjuna)
labhanteobtain
yuddhamwar
īdṛśamsuch