श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 2 · सांख्ययोग

Bhagavad Gita 2.21

मूल श्लोक :

वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

हे पृथानन्दन जो मनुष्य इस शरीरीको अविनाशी नित्य जन्मरहित और अव्यय जानता है वह कैसे किसको मारे और कैसे किसको मरवाये

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

आत्मा की वर्णनात्मक परिभाषा नहीं दी जा सकती परन्तु उसका संकेत नित्य अविनाशी आदि शब्दों के द्वारा किया जा सकता है। यहाँ इस श्लोक में प्रश्नार्थक वाक्य के द्वारा पूर्व श्लोकों में प्रतिपादित सिद्धान्त की ही पुष्टि करते हैं कि जो पुरुष अविनाशी आत्मा को जानता है वह कभी जीवन की वास्तविकताओं का सामना करने में शोकाकुल नहीं होता।आत्मा के अव्ययअविनाशी अजन्मा और शाश्वत स्वरूप को जान लेने पर कौन पुरुष स्वयं पर कर्तृत्व का आरोप कर लेगा  भगवान् कहते हैं कि ऐसा पुरुष न किसी को मारता है और न किसी के मरने का कारण बनता है। यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि इस वाक्य का सम्बन्ध स्वयं भगवान् तथा अर्जुन दोनों से ही है। यदि अर्जुन इस तथ्य को स्वयं समझ लेता है तो उसे स्वयं को अजन्मा आत्मा का हत्यारा मानने का कोई प्रश्न नहीं रह जाता है।किस प्रकार आत्मा अविनाशी है  अगले श्लोक में एक दृष्टांत के द्वारा इसे स्पष्ट करते हैं

English Translation By Swami Sivananda

Whosoever knows It to be indestructible, eternal, unborn and inexhaustible, how can that man slay, O Arjuna, or cause to be slain?

Transliteration

vedāvināśinaṃ nityaṃ ya enamajamavyayam
kathaṃ sa puruṣaḥ pārtha kaṃ ghātayati hanti kam

अनुवाद

हे पार्थ! जो व्यक्ति इस आत्मा को अविनाशी, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है, वह पुरुष कैसे किसी को मरवा सकता है या कैसे किसी को मार सकता है?

भावार्थ

भगवान कृष्ण अर्जुन को आत्मा की अमरता के विषय में समझाते हैं। वे तर्क देते हैं कि जब कोई व्यक्ति यह भली-भांति जान लेता है कि आत्मा नित्य और अविनाशी है, तो किसी को मारने या मरवाने का विचार ही अज्ञानपूर्ण और तर्कहीन हो जाता है। इसलिए अर्जुन को अपने संबंधियों के भौतिक शरीरों के नष्ट होने के भय से शोक नहीं करना चाहिए।

Translation

O Partha, how can a person who knows this soul to be indestructible, eternal, unborn, and immutable, kill anyone or cause anyone to kill?

Meaning

Lord Krishna continues to explain the immortal nature of the soul to Arjuna. He argues that once a person truly realizes the soul is eternal and indestructible, the concepts of killing or being killed become illogical. Therefore, Arjuna should not grieve for the physical bodies of his relatives, as their true essence can never be destroyed.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
वेदजानता है
अविनाशिनम्अविनाशी
नित्यम्नित्य
यःजो
एनम्इसको
अजम्अजन्मा
अव्ययम्अव्यय
कथम्कैसे
सःवह
पुरुषःव्यक्ति
पार्थहे पार्थ
कम्किसको
घातयतिमरवाता है
हन्तिमारता है
कम्किसको

Word by word

WordMeaning
vedaknows
avināśinamindestructible
nityameternal
yaḥwho
enamthis
ajamunborn
avyayamimmutable
kathamhow
saḥthat
puruṣaḥperson
pārthaO Partha
kamwhom
ghātayaticauses to be killed
hantikills
kamwhom