Chapter 2 · सांख्ययोग
Bhagavad Gita 2.19
मूल श्लोक :
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यतेHindi Translation By Swami Ramsukhdas
जो मनुष्य इस अविनाशी शरीरीको मारनेवाला मानता है और जो मनुष्य इसको मरा मानता है वे दोनों ही इसको नहीं जानते क्योंकि यह न मारता है और न मारा जाता है।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
आत्मा नित्य अविकारी होने से न मारी जाती है और न ही वह किसी को मारती है । शरीर के नाश होने से जो आत्मा को मरी मानने हैं या जो उसको मारने वाली समझते हैं वे दोनों ही आत्मा के वास्तविक स्वरूप को नहीं जानते और व्यर्थ का विवाद करते हैं। जो मरता है वह शरीर है और मैं मारने वाला हूँ यह भाव अहंकारी जीव का है। शरीर और अहंकार को प्रकाशित करने वाली चैतन्य आत्मा दोनों से भिन्न है। संक्षेप में इसका तात्पर्य यह है कि आत्मा न किसी क्रिया का कर्त्ता है और न किसी क्रिया का विषय अर्थात् उस पर किसी प्रकार की क्रिया नहीं की जा सकती।आत्मा किस प्रकार अविकारी है इसका उत्तर अगले श्लोक में दिया गया है।
English Translation By Swami Sivananda
He who takes the Self to be the slayer and he who thinks It is slain, neither of them ï1knowsï1. It slays not, nor is It slain.
Transliteration
ya enaṃ vetti hantāraṃ yaścainaṃ manyate hatam
ubhau tau na vijānīto nāyaṃ hanti na hanyateअनुवाद
जो इस (आत्मा) को मारने वाला समझता है, और जो इसे मारा हुआ मानता है, वे दोनों ही सत्य नहीं जानते; क्योंकि यह (आत्मा) न तो किसी को मारता है और न ही किसी के द्वारा मारा जाता है।
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को आत्मा की अमरता और अकर्ता भाव का ज्ञान दे रहे हैं। अज्ञान के कारण मनुष्य शरीर को ही सब कुछ मान लेता है और मृत्यु से भयभीत होता है। वास्तव में आत्मा शाश्वत है, वह न तो किसी की हत्या कर सकती है और न ही कोई अस्त्र-शस्त्र उसे नष्ट कर सकता है।
Translation
He who thinks this (soul) to be a killer, and he who thinks it to be killed, both of them do not know the truth. This (soul) neither kills nor is killed.
Meaning
In this verse, Lord Krishna imparts the knowledge of the soul’s immortality and non-doership to Arjuna. Out of ignorance, a person identifies with the physical body and fears death. In reality, the soul is eternal; it can neither slay anyone nor be destroyed by any weapon.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| यः | जो |
| एनम् | इसको (आत्मा को) |
| वेत्ति | जानता है |
| हन्तारम् | मारने वाला |
| यः | जो |
| च | और |
| एनम् | इसको |
| मन्यते | मानता है |
| हतम् | मारा हुआ |
| उभौ | दोनों |
| तौ | वे |
| न | नहीं |
| विजानीतः | जानते हैं |
| न | नहीं |
| अयम् | यह |
| हन्ति | मारता है |
| न | नहीं |
| हन्यते | मारा जाता है |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| yaḥ | who |
| enam | this (soul) |
| vetti | knows |
| hantāram | the killer |
| yaḥ | who |
| ca | and |
| enam | this |
| manyate | thinks |
| hatam | killed |
| ubhau | both |
| tau | they |
| na | not |
| vijānītaḥ | know |
| na | neither |
| ayam | this |
| hanti | kills |
| na | nor |
| hanyate | is killed |