Chapter 2 · सांख्ययोग
Bhagavad Gita 2.1
मूल श्लोक :
सञ्जय उवाच
तं तथा कृपयाऽविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनःHindi Translation By Swami Ramsukhdas
सञ्जय बोले वैसी कायरतासे आविष्ट उन अर्जुनके प्रति जो कि विषाद कर रहे हैं और आँसुओंके कारण जिनके नेत्रोंकी देखनेकी शक्ति अवरुद्ध हो रही है भगवान् मधुसूदन ये (आगे कहे जानेवाले) वचन बोले।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
द्वितीय अध्याय का प्रारम्भ संजय के कथन से होता है जिसमें वह चुने हुये शब्दों से अर्जुन की विषादमयी मानसिक स्थिति का स्पष्ट चित्रण करता है। अर्जुन का मन करुणा और विषाद से भर गया है। इस युक्ति से स्पष्ट होता है कि अर्जुन परिस्थितियों का स्वामी न होकर स्वयं उनका शिकार हो गया था। इस प्रकार एक दुर्बल व्यक्ति ही परिस्थितियों का शिकार बनकर जीवन संघर्ष के प्रत्येक अवसर पर असफल होता है। अर्जुन अपनी नैराश्यपूर्ण अवस्था में इस समय ऐसी ही बाह्य परिस्थितियों का शिकार हो गया था। अर्जुन की विषादावस्था का वर्णन करने के साथ ही संजय हमें यह भी संकेत करता है कि उसका आन्तरिक व्यक्तित्व भग्न हो गया था और उसके चरित्र में गहरी दरार पड़ गयी थी। अपने समय का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी होकर भी वह किसी सामान्य युवती के समान रुदन कर रहा थाइस प्रकार करुणा और शोक से अभिभूत एवं अश्रुरहित रोदन करते हुये अर्जुन से मधुसूदन (मधु नामक असुर का वध करने वाले) भगवान् श्रीकृष्ण ने निम्नलिखित वाक्य कहा। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि अश्रुरहित रोदन को आधुनिक मनोविज्ञान मानसिक उद्विग्नता की चरम स्थिति मानता है।
English Translation By Swami Sivananda
Sanjaya said To him who was thus overcome with pity and who was despondent, with eyes full of tears and agitated, Madhusudana (the destroyer of Madhu) or Krishna spoke these words.
Transliteration
sañjaya uvāca
taṃ tathā kṛpayāviṣṭamaśrupūrṇākulekṣaṇam
viṣīdantamidaṃ vākyamuvāca madhusūdanaḥअनुवाद
संजय ने कहा — इस प्रकार करुणा से व्याप्त, आंसुओं से भरे और व्याकुल नेत्रों वाले, शोक करते हुए उस (अर्जुन) से मधुसूदन (कृष्ण) ने यह वचन कहा।
भावार्थ
संजय धृतराष्ट्र को कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान का दृश्य बता रहे हैं। अर्जुन अपने सगे-संबंधियों को देखकर गहरे शोक और करुणा में डूब गए हैं। उनकी इस दयनीय और व्याकुल स्थिति को देखकर भगवान कृष्ण अब उन्हें उपदेश देना आरंभ करेंगे।
Translation
Sanjaya said: To him who was thus overcome with compassion, whose eyes were filled with tears and agitated, and who was lamenting, Madhusudana (Krishna) spoke these words.
Meaning
Sanjaya is describing the scene on the battlefield of Kurukshetra to Dhritarashtra. Arjuna is overwhelmed with deep sorrow and compassion upon seeing his relatives arrayed for battle. Seeing his pitiful and agitated state, Lord Krishna is now about to begin His teachings to dispel Arjuna’s ignorance.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सञ्जयः | संजय |
| उवाच | ने कहा |
| तम् | उस (अर्जुन) को |
| तथा | इस प्रकार |
| कृपया | करुणा से |
| आविष्टम् | व्याप्त |
| अश्रु | आंसुओं से |
| पूर्ण | भरे हुए |
| आकुल | व्याकुल |
| ईक्षणम् | नेत्रों वाले |
| विषीदन्तम् | शोक करते हुए |
| इदम् | यह |
| वाक्यम् | वचन |
| उवाच | कहा |
| मधुसूदनः | मधुसूदन (कृष्ण) ने |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| sañjayaḥ | Sanjaya |
| uvāca | said |
| tam | to him (Arjuna) |
| tathā | thus |
| kṛpayā | by compassion |
| āviṣṭam | overwhelmed |
| aśru | with tears |
| pūrṇa | filled |
| ākula | agitated |
| īkṣaṇam | eyes |
| viṣīdantam | lamenting |
| idam | this |
| vākyam | word |
| uvāca | spoke |
| madhusūdanaḥ | Madhusudana (Krishna) |