Chapter 18 · मोक्षसंन्यासयोग
Bhagavad Gita 18.76
मूल श्लोक :
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्
केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुःHindi Translation By Swami Ramsukhdas
हे राजन् भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद करकरके मैं बारबार हर्षित हो रहा हूँ।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
ईश्वरीय काव्य गीता को श्रवण करके संजय इस श्लोक में अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहता है कि भगवान् केशव और मानव अर्जुन सम्पूर्ण एवं अपूर्ण? उच्च एवं निम्न के मध्य यह संवाद अद्भुत और पुण्यपवित्र है।संजय द्वारा श्रवण किया गया गीता का ज्ञान इतना गम्भीर और आकर्षक रूप से बोधगम्य था कि वह उसे पुन पुन स्मरण करके अपने हृदय में बारम्बार हर्षित हो रहा था।गीता जीवन जीने की कला को बताने वाली सूचनाओं की निर्देशिका है अत? यहाँ भी महर्षि व्यास जी अप्रत्यक्ष रूप से हमें साधनमार्ग का संकेत करते हैं। संस्मृत्य (स्मरण करके) शब्द के द्वारा वे यह दर्शाते हैं कि साधक को श्रवण करने के पश्चात्? बारम्बार मनन? अर्थात् प्राप्त ज्ञान पर चिन्तन करना चाहिए। सम्यक् ज्ञान का फल हर्ष होगा।गर्भ से शवागर्त तक की निरर्थक जीवन यात्रा में? जब मनुष्य कोई निश्चित दिव्य लक्ष्य देख लेता है? तब वह प्रसन्न हो जाता है। गीता का अध्ययन न केवल हमारे दैनिक जीवन को ही अर्थवन्त बना देता है? वरन् सम्पूर्ण जगत् को एक सुनिश्चित आशा और आनन्द का सन्देश भी देता है। गीता हमें जीवन की अन्धेरी गलियों से उठाकर? अपने आन्तरिक साम्राज्य के राजसिंहासन पर प्रतिष्ठित कर देती है। वह मनुष्य को अपनी आन्तरिक परिस्थितियों का सम्राट बना देती है। अज्ञान की दशा में मनुष्य के जीवन का अर्थ केवल वस्तुओं और प्राणियों के आविर्भाव और तिरोभाव रूपी मृत्यु का विक्षिप्त नृत्य ही होता है परन्तु गीताज्ञान से शिक्षित पुरुष उसी दिन प्रतिदिन के सामान्य जीवन में एक लय को पहचानता है? सुन्दरता का अवलोकन करता है और मधुर संगीत का श्रवण करता है।विश्वरूप दर्शन का स्मरण करते हुए संजय कहता है
English Translation By Swami Sivananda
O King, remembering this wonderful and holy dialogue between Krishna and Arjuna, I rejoice again and again.
Transliteration
rājan saṃsmṛtya saṃsmṛtya saṃvādam imam adbhutam
keśavārjunayoḥ puṇyaṃ hṛṣyāmi ca muhurmuhuḥअनुवाद
हे राजन! केशव और अर्जुन के इस अद्भुत तथा पवित्र संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ
भावार्थ
संजय धृतराष्ट्र को संबोधित करते हुए अपनी आंतरिक प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं। वे कहते हैं कि श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए इस परम पावन और विस्मयकारी संवाद का स्मरण करने मात्र से ही उनका हृदय बार-बार आनंद से भर उठता है। यह संवाद केवल ज्ञान का स्रोत नहीं है, बल्कि परम आनंद प्रदान करने वाला है।
Translation
O King, remembering again and again this wonderful and sacred dialogue between Keshava and Arjuna, I rejoice over and over again
Meaning
Sanjaya expresses his inner ecstasy to King Dhritarashtra. He states that simply by recalling this sacred and astonishing dialogue between Lord Krishna and Arjuna, his heart is filled with joy repeatedly. This conversation is not just a source of supreme wisdom but also a source of divine bliss.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| राजन् | हे राजा (धृतराष्ट्र) |
| संस्मृत्य | स्मरण करके |
| संस्मृत्य | बार-बार स्मरण करके |
| संवादम् | संवाद को |
| इमम् | इस |
| अद्भुतम् | अद्भुत |
| केशव-अर्जुनयोः | श्रीकृष्ण और अर्जुन के |
| पुण्यम् | पवित्र |
| हृष्यामि | मैं हर्षित हो रहा हूँ |
| च | और |
| मुहुः-मुहुः | बार-बार |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| rājan | O King |
| saṃsmṛtya | remembering |
| saṃsmṛtya | remembering repeatedly |
| saṃvādam | dialogue |
| imam | this |
| adbhutam | wonderful |
| keśava-arjunayoḥ | of Keshava and Arjuna |
| puṇyam | sacred |
| hṛṣyāmi | I rejoice |
| ca | and |
| muhurmuhuḥ | again and again |