Chapter 18 · मोक्षसंन्यासयोग
Bhagavad Gita 18.7
मूल श्लोक :
नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते
मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितःHindi Translation By Swami Ramsukhdas
नियत कर्मका तो त्याग करना उचित नहीं है। उसका मोहपूर्वक त्याग करना तामस कहा गया है।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
नियत अर्थात् कर्तव्य कर्मों का त्याग अत्यन्त निम्नस्तर का तामस त्याग माना गया है। नित्य और नैमित्तक कर्मों के सम्मिलित रूप को ही नियत कर्म कहते हैं। जब तक मनुष्य अपने समाज के एक सदस्य के रूप में जीवन यापन करता है? तब तक उसे वह समाज? सुरक्षा तथा उन्नति का लाभ भी प्रदान करता है। अत हिन्दू नीति के अनुसार? मनुष्य को अपने कर्तव्यों को त्यागने का कोई अधिकार नहीं है।यदि कोई व्यक्ति अज्ञानवश अपने नैतिक कर्तव्यों का त्याग करता है तब भी वह क्षम्य नहीं है। जैसे? संविधान के और भौतिक जगत् के प्राकृतिक नियमों के पालन के संबंध में नियम का अज्ञान क्षम्य नहीं माना जाता? वैसे ही आध्यात्मिक क्षेत्र में भी यही नियम लागू होता है। अज्ञान और अविवेक के कारण यदि कोई व्यक्ति अपने कर्तव्य पालन के द्वारा समाज सेवा नहीं करता है? तो उसका यह त्याग मूढ़ अर्थात् तामसिक त्याग है।
English Translation By Swami Sivananda
Verily the renunciation of obligatory action is not proper; the abandonment of the same from delusion is declared to be Tamasic.
Transliteration
niyatasya tu saṃnyāsaḥ karmaṇo nopapadyate
mohāttasya parityāgastāmasaḥ parikīrtitaḥअनुवाद
नियत (कर्तव्य) कर्म का संन्यास (त्याग) तो उचित नहीं है मोह के कारण उसका परित्याग करना तामस कहा गया है
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण नियत कर्मों के त्याग का निषेध करते हैं। शास्त्र सम्मत आवश्यक कर्तव्यों का त्याग कभी भी उचित नहीं माना जाता। यदि कोई अज्ञान या मोहवश अपने अनिवार्य कर्तव्यों को छोड़ देता है, तो ऐसे त्याग को तामसी त्याग कहा जाता है जो मनुष्य को अवनति की ओर ले जाता है।
Translation
The renunciation of prescribed duty is not proper its abandonment out of delusion is declared to be in the mode of ignorance
Meaning
In this verse, Lord Krishna explains that the renunciation of prescribed duties is improper. One’s obligatory duties should never be abandoned. If someone gives up their essential duties due to delusion or ignorance, such renunciation is classified as being in the mode of ignorance (tamas).
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| नियतस्य | नियत (शास्त्र-विहित) |
| तु | लेकिन |
| संन्यासः | त्याग |
| कर्मणः | कर्म का |
| न | नहीं |
| उपपद्यते | उचित है |
| मोहात् | मोह के कारण |
| तस्य | उसका |
| परित्यागः | परित्याग |
| तामसः | तामस (अज्ञानमय) |
| परिकीर्तितः | कहा गया है |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| niyatasya | of prescribed |
| tu | but |
| saṃnyāsaḥ | renunciation |
| karmaṇaḥ | of duty |
| na | not |
| upapadyate | is proper |
| mohāt | out of delusion |
| tasya | of that |
| parityāgaḥ | abandonment |
| tāmasaḥ | in the mode of ignorance |
| parikīrtitaḥ | is declared |