Chapter 18 · मोक्षसंन्यासयोग
Bhagavad Gita 18.28
मूल श्लोक :
अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः
विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यतेHindi Translation By Swami Ramsukhdas
जो कर्ता असावधान? अशिक्षित? ऐंठअकड़वाला? जिद्दी? उपकारीका अपकार करनेवाला? आलसी? विषादी और दीर्घसूत्री है? वह तामस कहा जाता है।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
यहाँ तामस ज्ञान से प्रेरित होकर तामस कर्म करने वाले तामस कर्ता का विस्तृत वर्णन किया गया है।अयुक्त जिसका मन? बुद्धि के साथ युक्त न हो वह व्यक्ति अयुक्त कहलाता है। बुद्धि के मार्गदर्शन की उपेक्षा करके तामसिक कर्ता अपनी मनमानी ही करता है? बुद्धिमानी नहीं प्राकृत अत्यन्त असभ्य और असंस्कृत बुद्धि का पुरुष प्राकृत कहा जाता है। सुसंस्कृत पुरुष वह है? जो अपने मन की निम्नस्तरीय प्रवृत्तियों को अपने वश में रखता है। किन्तु तामसी पुरुष अयुक्त होने के कारण प्राकृत स्वभाव का होता है। उसे अपने ऊपर किसी भी प्रकार का संयम नहीं होता। बुद्धि का दर्पण दर्शाने पर भी वह स्वीकार नहीं करता कि दर्पण में प्रतिबिम्बित असभ्यता आदि अवगुण उसके अपने ही हैं।स्तब्ध एक दण्ड के समान वह कभी किसी के आगे नम्रभाव से नतमस्तक नहीं होता। वह ऐसा हठी और दुराग्रही होता है कि किसी के सदुपदेश का वह श्रवण भी नहीं करना चाहता? पालन करना तो दूर की बात है। किसी का भी उपदेश उसे सहन नहीं होता है।शठ अर्थात् मायावी। तामस कर्ता पर कभी विश्वास नहीं किया जा सकता? क्यों कि वह अपने वास्तविक उद्देश्यों को गुप्त रखकर लोगों की वंचना करने के लिए अन्य प्रकार के कार्य करता है। प्रवंचना के ऐसे कार्यों से समाज के लोगों को दुख और कष्ट भोगने पड़ते हैं।नैष्कृतिक श्री शंकराचार्य इसका अर्थ बताते हुए कहते हैं? तामसिक कर्ता परवृत्तिच्छेदनपर अर्थात् दूसरे की आजीविका का नाश करने वाला होता है। अन्य लोगों के साथ लड़ाई झगड़ा करने पर सदैव उतारू रहता है और शत्रुता और बदले की भावना रखता है।अलस तामस कर्ता सहज ही किसी कार्य में प्रवृत्त नहीं होता? कर्तव्य कर्म में भी नहीं। बिना परिश्रम के फलोपभोग की उसकी कामना रहती है। ऐसा आलसी पुरुष विचार करने में भी असमर्थ होता है। लंका के तीन बन्धु विभीषण? रावण और कुम्भकर्ण क्रमश सात्त्विक? राजसिक और तामसिक कर्ताओं के प्रतीक हैं।विषादी सदा उदास रहता है। किसी भी वस्तु या व्यक्ति से वह सन्तुष्ट नहीं रहता। जीवन की चुनौतियों का सामना करने की न उसमें क्षमता होती हैं और न दृढ़ता। इसलिए? वह किसी ऐसे सुरक्षित स्थान पर निवास करना चाहता है? जहाँ जगत् की समस्याएं न हों और वह निर्विघ्न रूप से विषयोपभोग,कर सके।दीर्घसूत्री वह पुरुष जो तत्काल करने योग्य कर्म को कल करेंगे ऐसा कहतेकहते एक मास के पश्चात् भी नहीं करता है? दीर्घसूत्री कहलाता है। वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है? तो उसे कार्यान्वित कर नहीं पाता।इस प्रकार? तीन श्लोकों में भगवान् श्रीकृष्ण ने त्रिविध कर्ताओं के आन्तरिक स्वभाव का अत्यन्त सुन्दर चित्रण किया है। यह सदैव ध्यान रहे कि उपर्युक्त चित्रण परपरीक्षण के लिए न होकर आत्मनिरीक्षण एवं आत्मसुधार के लिए है।भगवान् आगे कहते हैं
English Translation By Swami Sivananda
Unsteady, vulgar, unbending, cheating, malicious, lazy, desponding and procrastinating such an agent is called Tamasic.
Transliteration
ayuktaḥ prākṛtaḥ stabdhaḥ śaṭho naiṣkṛtiko'lasaḥ
viṣādī dīrghasūtrī ca kartā tāmasa ucyateअनुवाद
अयुक्त, प्राकृत, स्तब्ध, शठ, नैष्कृतिक, आलसी, विषादी और दीर्घसूत्री कर्ता तामस कहा जाता है
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण तामसी कर्ता के लक्षणों का वर्णन करते हैं। ऐसा व्यक्ति असंयमी, अशिष्ट, घमंडी, दूसरों को धोखा देने वाला, दूसरों का अपमान करने वाला, आलसी, हमेशा दुखी रहने वाला और हर काम में अत्यधिक देरी करने वाला होता है। ये सभी गुण अज्ञान और अंधकार (तमस) से उत्पन्न होते हैं।
Translation
The agent who is undisciplined, vulgar, stubborn, deceitful, malicious, lazy, despondent, and procrastinating is said to be of the nature of ignorance
Meaning
In this verse, Lord Krishna describes the characteristics of a Tamasic agent (doer). Such a person is undisciplined, vulgar, stubborn, deceitful, malicious, lazy, chronically depressed, and a procrastinator. These traits stem from ignorance and darkness, leading to inaction or destructive action.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अयुक्तः | असंयमी (चंचल चित्त वाला) |
| प्राकृतः | अशिष्ट (अशिक्षित या गँवार) |
| स्तब्धः | घमंडी (जिद्दी) |
| शठः | धूर्त (कपटी) |
| नैष्कृतिकः | दूसरों का अपमान करने वाला (या दूसरों की आजीविका बिगाड़ने वाला) |
| अलसः | आलसी |
| विषादी | शोकयुक्त (उदास रहने वाला) |
| दीर्घसूत्री | दीर्घसूत्री (काम को टालने वाला) |
| च | और |
| कर्ता | कर्ता |
| तामसः | तामस |
| उच्यते | कहा जाता है |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| ayuktaḥ | undisciplined |
| prākṛtaḥ | vulgar (unrefined) |
| stabdhaḥ | stubborn (obstinate) |
| śaṭhaḥ | deceitful |
| naiṣkṛtikaḥ | malicious (insulting others) |
| alasaḥ | lazy |
| viṣādī | despondent (morose) |
| dīrghasūtrī | procrastinating (dilatory) |
| ca | and |
| kartā | doer (agent) |
| tāmasaḥ | tamasic (characterized by ignorance) |
| ucyate | is said to be |