श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 18 · मोक्षसंन्यासयोग

Bhagavad Gita 18.13

मूल श्लोक :

पञ्चैतानि महाबाहो कारणानि निबोध मे
सांख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि सिद्धये सर्वकर्मणाम्

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

हे महाबाहो कर्मोंका अन्त करनेवाले सांख्यसिद्धान्तमें सम्पूर्ण कर्मोंकी सिद्धिके लिये ये पाँच कारण बताये गये हैं? इनको तू मेरेसे समझ।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

त्रिविध त्याग के सन्दर्भ में भगवान् श्रीकृष्ण ने निरहंकार और निसंग भाव से कर्म करने वाले पुरुष को सात्विक त्यागी कहा था। अत स्वाभाविक ही है कि अर्जुन के मन में कर्म के स्वरूप को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है। इसलिए भगवान् श्रीकृष्ण प्रस्तुत खण्ड में? कर्म के स्थूल रूप तथा प्रेरणा? उद्देश्य आदि सूक्ष्म स्वरूप का भी वर्णन करते हैं।किसी भी लौकिक अथवा आध्यात्मिक कर्म को सम्पादित करने के लिए पाँच कारणों की अपेक्षा होती है। ये मानों कर्म के अंग हैं? जिनके बिना कर्म की सिद्धि नहीं हो सकती। यदि मनुष्य अपने कर्मों को अनुशासित और सुनियोजित कर आन्तरिक सांस्कृतिक विकास को सम्पादित करना चाहता हो? तो उसे अत्याधिक साहस? प्रयोजन का सातत्य? आत्मविश्वास तथा बौद्धिक क्षमता की आवश्यकता होती है। इसलिए भगवान् यहाँ अर्जुन को महाबाहो के नाम से सम्बोधित कर उसकी शूरवीरता का आह्वान करते हैं।कर्मसम्पादन के लिए आवश्यक पाँच कारणों का वर्णन सांख्य दर्शन में किया गया है। यहाँ सांख्य शब्द से तात्पर्य वेदान्त से है कपिल मुनि जी के सांख्य दर्शन से नहीं? क्योंकि उसमें इनका वर्णन नहीं किया गया है। इस श्लोक में प्रयुक्त कृतान्त शब्द सांख्य का विशेषण है। कृतान्त का अर्थ है कर्मों का अन्त। वेदान्त में उपदिष्ट आत्म ज्ञान के होने पर अहंकार का अन्त हो जाता है और उसी के साथ उसके कर्मों की समाप्ति हो जाती है।इसलिए? वेदान्त का विशेषण कृतान्त कहा गया हैं। अगले श्लोक में उन पाँच कारणों को बताते हैं

English Translation By Swami Sivananda

Learn from Me, O mighty-armed Arjuna, these five causes as declared in the Sankhya system for the accomplishment of all actions.

Transliteration

pañcaitāni mahābāho kāraṇāni nibodha me
sāṅkhye kṛtānte proktāni siddhaye sarvakarmaṇām

अनुवाद

हे महाबाहो! समस्त कर्मों की सिद्धि के लिए सांख्य सिद्धांत (वेदांत) में बताए गए इन पांच कारणों को तुम मुझसे जानो।

भावार्थ

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि किसी भी कर्म की पूर्णता केवल मनुष्य के हाथ में नहीं होती। वे सांख्य दर्शन (वेदांत) का संदर्भ देते हुए कहते हैं कि प्रत्येक कर्म की सिद्धि के पीछे पांच मुख्य कारण होते हैं। इन कारणों को समझने से मनुष्य स्वयं को कर्ता मानने के अहंकार से मुक्त हो सकता है।

Translation

O mighty-armed one, learn from Me these five factors declared in the Samkhya doctrine, which is the end of action, for the accomplishment of all works.

Meaning

In this verse, Lord Krishna explains to Arjuna that the completion of any action does not depend solely on the individual. Referencing the Samkhya philosophy (Vedanta), He states that there are five factors responsible for the accomplishment of all actions. Understanding these factors helps a person overcome the ego of thinking themselves as the sole doer.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
पञ्चपांच
एतानिइन
महाबाहोहे महाबाहु (अर्जुन)
कारणानिकारणों को
निबोधजानो
मेमुझसे
साङ्ख्येसांख्य में (वेदांत में)
कृतान्तेसिद्धांत में (जो कर्मों का अंत करने वाला है)
प्रोक्तानिकहे गए हैं
सिद्धयेसिद्धि के लिए
सर्व-कर्मणाम्सभी कर्मों की

Word by word

WordMeaning
pañcafive
etānithese
mahābāhoO mighty-armed one
kāraṇānicauses / factors
nibodhalearn / know
mefrom Me
sāṅkhyein the Samkhya
kṛtāntein the doctrine which ends action
proktānideclared / described
siddhayefor the accomplishment
sarva-karmaṇāmof all actions