Chapter 17 · श्रद्धात्रयविभागयोग
Bhagavad Gita 17.8
मूल श्लोक :
आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः
रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाःHindi Translation By Swami Ramsukhdas
आयु? सत्त्वगुण? बल? आरोग्य? सुख और प्रसन्नता बढ़ानेवाले? स्थिर रहनेवाले? हृदयको शक्ति देनेवाले? रसयुक्त तथा चिकने -- ऐसे आहार अर्थात् भोजन करनेके पदार्थ सात्त्विक मनुष्यको प्रिय होते हैं।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
आध्यात्मिक प्रवृत्ति के सात्त्विक पुरुषों को स्वभावत वही आहार रुचिकर होता है? जो आयुवर्धक हो? न कि केवल शरीर को स्थूल बनाने वाला आहार। आहार ऐसा हो? जो ध्यानाभ्यास के लिए आवश्यक ओज प्रदान करे तथा विषयों के प्रलोभनों से अविचलित रहने के लिए बल की वृद्धि करे। अरोग्यवर्धक आहार सात्त्विक पुरुष को प्रिय होता है। उसी प्रकार प्रीति और मन की प्रसन्नतावर्धक आहार सात्त्विक कहलाता है।भोज्य पदार्थों के गुणानुसार यहाँ उन्हें चार भागों में वर्गीकृत किया गया है। वे हैं रस्या रसयुक्त? स्निग्ध चिकनाई से युक्त? स्थिर और मनप्रसाद के अनुकूल हृद्या। सात्त्विक पुरुषों को ऐसे समस्त पदार्थ स्वभावत प्रिय होते हैं? जो उपर्युक्त गुणों से युक्त होते हैं अर्थात् आयुबलादि विवर्धक होते हैं।इसमें कोई सन्देह नहीं है कि भोक्ता पर भोजन का प्रभाव पड़ता है। सामान्यत? मनुष्य जिस प्रकार का भोजन करता है? वैसा ही प्रभाव उसके मन पर पड़ता है। उसी प्रकार मनुष्य का स्वभाव उसके आहार की रुचि को नियन्त्रित करता है। यह देखा जाता है कि प्राणीमात्र की किसी विशेष परिस्थिति में किसी आहार विशेष की तीव्र इच्छा होती है। कुत्ते और बिल्ली रोगादि के कारण कभीकभी घास खाने लगते हैं? गाय लवण को चाटती है? छोटे बालक मिट्टी खाते हैं और गर्भवती स्त्रियों को खटाई आदि खाने की तीव्र इच्छा होती है।
English Translation By Swami Sivananda
The foods which increase life, purity, strength, health, joy and cheerfulness (good appetite), which are savoury and oleaginous, substantial and agreeable, are dear to the Sattvic (pure) people.
Transliteration
āyuḥ-sattva-balārogya-sukha-prīti-vivardhanāḥ
rasyāḥ snigdhāḥ sthirā hṛdyā āhārāḥ sāttvika-priyāḥअनुवाद
आयु, बुद्धि, बल, आरोग्य, सुख और प्रीति को बढ़ाने वाले तथा रसयुक्त, चिकने, स्थिर रहने वाले और हृदय को प्रिय लगने वाले आहार सात्त्विक पुरुषों को प्रिय होते हैं
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण सात्त्विक भोजन के लक्षणों और उनके प्रभावों का वर्णन करते हैं। सात्त्विक आहार न केवल शारीरिक स्वास्थ्य और शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि मानसिक पवित्रता, प्रसन्नता और संतोष भी प्रदान करता है। ऐसा भोजन प्राकृतिक रूप से स्वादिष्ट, पुष्टिकारक और हृदय को प्रिय होता है।
Translation
Foods that increase life, purity, strength, health, happiness, and cheerfulness, and which are savory, fatty, substantial, and agreeable to the heart, are dear to those in the mode of goodness
Meaning
In this verse, Lord Krishna describes the characteristics and effects of sattvic food. Sattvic diet not only enhances physical health, longevity, and strength, but also promotes mental purity, happiness, and satisfaction. Such foods are naturally flavorful, nourishing, wholesome, and pleasing to the heart.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| आयुः | आयु (जीवनकाल) |
| सत्त्व | बुद्धि या अंतःकरण की शुद्धि |
| बल | शक्ति |
| आरोग्य | स्वास्थ्य |
| सुख | सुख |
| प्रीति | आनंद या प्रीति |
| विवर्धनाः | बढ़ाने वाले |
| रस्याः | रसयुक्त (स्वादिष्ट) |
| स्निग्धाः | चिकने (स्नेहयुक्त) |
| स्थिराः | स्थिर रहने वाले (शरीर में देर तक टिकने वाले) |
| हृद्याः | हृदय को प्रिय लगने वाले |
| आहाराः | भोजन |
| सात्त्विक-प्रियाः | सात्त्विक पुरुषों को प्रिय होते हैं |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| āyuḥ | life-span |
| sattva | purity of mind |
| bala | strength |
| ārogya | health |
| sukha | happiness |
| prīti | satisfaction/cheerfulness |
| vivardhanāḥ | increasing |
| rasyāḥ | juicy/savory |
| snigdhāḥ | unctuous/fatty |
| sthirāḥ | substantial/sustaining |
| hṛdyāḥ | pleasing to the heart |
| āhārāḥ | foods |
| sāttvika-priyāḥ | dear to those in the mode of goodness |