श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग

Bhagavad Gita 16.8

मूल श्लोक :

असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम्
अपरस्परसम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम्

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

वे कहा करते हैं कि संसार असत्य? अप्रतिष्ठित और बिना ईश्वरके अपनेआप केवल स्त्रीपुरुषके संयोगसे पैदा हुआ है। इसलिये काम ही इसका कारण है? और कोई कारण नहीं है।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

आसुरी लोगों के वर्णन में हम ऐसे नितान्त संशयी और भौतिकवादी पुरुष को पहचान सकते हैं? जो जीवन की ओर केवल अपनी सीमित बुद्धि के दृष्टिकोण से ही देखता है। इसलिए? स्वाभाविक ही है कि वह न जीवन का कोई चरम लक्ष्य देख पाता है? और न ही इस अनित्य और परस्पर असंबद्ध प्रतीत होने वाली घटनाओं से पूर्ण जगत् का कोई नित्य अधिष्ठान स्वीकार कर पाता है। इन भौतिकवादियों की बुद्धि प्रखर होती है और वे स्वतन्त्र और मौलिक विचार करने में समर्थ होते हैं। इन लोगों को अल्प मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है? जिससे कि वे अपनी सीमित बुद्धि के परे भी देख सकें। इस श्लोक में भौतिकवादी दृष्टिकोण का वर्णन किया गया है।भौतिकवादी वैज्ञानिक पद्धति से जगत् का निरीक्षण और विश्लेषण करते हैं? फिर भी वे उस सत्य को नहीं पहचान पाते? जो इस विश्व को धारण किये हुए है। वे परिवर्तनों को देखतें हैं? और इस सतत परिवर्तन को ही वे जगत् समझ लेते हैं? जिसके लिए किसी नित्य? अविकारी अधिष्ठान का होना वे नहीं मानते हैं। परन्तु? वैज्ञानिक भी अब स्वीकार करते हैं कि नित्य? अपरिवर्तनशील अधिष्ठान के बिना न जगत् में परिवर्तन हो सकता है और न ही वह ज्ञात हो सकता है। परिवर्तन तो एक सापेक्ष घटना मात्र है। एक स्थिर और गतिशून्य पर्दे के बिना चलचित्र का प्रक्षेपण नहीं किया जा सकता और नदी के स्थिर तल के बिना जल का अखण्ड प्रवाह नहीं बना रह सकता। उसी प्रकार अधिष्ठान के बिना आभास नहीं हो सकता। सम्पूर्ण जगत् का यह आश्रय ही सत्य कहलाता है परन्तु आसुरी स्वभाव के लोगों के अनुसार? जगत् निराश्रय है? सत्यरहित है।अनीश्वरम्  जगत् का कोई अधिष्ठान नहीं है तब कमसेकम? क्या कोई सर्वज्ञ सर्वशासक है? जो जगत् की घटनाओं को नियन्त्रित करता है  भोगवादी लोगों के अनुसार ऐसा कोई नियन्ता और निर्माता नहीं है। न सृष्टिकर्ता है और न पालनकर्ता ही है।इनके मतानुसार यह सम्पूर्ण चराचर जगत् केवल महाभूतों के परम्पर संबंध से उत्पन्न हुआ है और यह संबंध जिस किसी रूप में परिणित होता है? वह केवल संयोग की बात है? और न कि उसके पार्श्व में कोई नियम है। प्राणियों की उत्पत्ति का एकमात्र कारण है? कामवासना। आधुनिक मनोवैज्ञानिक भी इस बात पर बल देते हैं कि कामवासना ही अन्य समस्त वृत्तियों की जननी है? जिसके कारण समस्त घटनाएं घट रही हैं और जीवन की समस्त उपलब्धियाँ संभव,होती हैं।आसुरी लोगों के दृष्टिकोण को दर्शाने के पश्चात् भगवान् श्रीकृष्ण ऐसे लोगों के भाग्य के प्रति सहानुभूति अनुभव करते हुए उनके कर्मों को बताते हैं

English Translation By Swami Sivananda

They say, "This universe is without truth, without (moral) basis, without a God, brought about by mutual union, with lust for its cause; what else?"

Transliteration

asatyam apratiṣṭhaṃ te jagad āhur anīśvaram
aparaspara-sambhūtaṃ kim anyat kāma-haitukam

अनुवाद

वे (आसुरी प्रवृत्ति के लोग) कहते हैं कि यह जगत् सत्य-रहित, बिना किसी आधार के और बिना ईश्वर के है। यह केवल स्त्री-पुरुष के संयोग से उत्पन्न हुआ है, काम-वासना के अतिरिक्त इसका और क्या कारण हो सकता है?

भावार्थ

इस श्लोक में भगवान कृष्ण आसुरी प्रवृत्ति के लोगों की नास्तिक और भौतिकवादी विचारधारा का वर्णन कर रहे हैं। ऐसे लोग मानते हैं कि सृष्टि का कोई नैतिक आधार या परम सत्य नहीं है और न ही इसका कोई नियंता ईश्वर है। उनके अनुसार, यह संसार केवल भौतिक तत्वों और काम-वासना के संयोग से स्वतः उत्पन्न हुआ है, जिसका कोई उच्च आध्यात्मिक उद्देश्य नहीं है।

Translation

They (the demonic) say that the world is without truth, without a moral basis, and without a God. They claim it is brought about by mutual union, caused by lust alone, and nothing else.

Meaning

In this verse, Lord Krishna describes the materialistic and atheistic worldview of demonic natures. Such individuals believe that the universe has no moral foundation, no ultimate truth, and no governing God. They argue that existence is merely a product of physical union driven by lust, denying any higher spiritual purpose or divine creation.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
असत्यम्झूठा (सत्य-रहित)
अप्रतिष्ठम्बिना किसी आधार के
तेवे (आसुरी लोग)
जगत्संसार को
आहुःकहते हैं
अनीश्वरम्बिना ईश्वर के
अपरस्परपरस्पर (स्त्री-पुरुष के) संयोग से
सम्भूतम्उत्पन्न
किम्क्या
अन्यत्अन्य (दूसरा कारण)
काम-हैतुकम्केवल काम-वासना ही जिसका कारण है

Word by word

WordMeaning
asatyamuntruthful (without truth)
apratiṣṭhamwithout foundation
tethey (the demonic)
jagatthe universe
āhuḥsay
anīśvaramwithout a controller or God
aparasparaby mutual union (of male and female)
sambhūtamarisen
kimwhat
anyatother
kāma-haitukamhaving lust as its only cause