श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग

Bhagavad Gita 16.19

मूल श्लोक :

तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान्
क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

उन द्वेष करनेवाले? क्रूर स्वभाववाले और संसारमें महान् नीच? अपवित्र मनुष्योंको मैं बारबार आसुरी योनियोंमें गिराता ही रहता हूँ।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

यहाँ भगवान् श्रीकृष्ण कर्माध्यक्ष और कर्मफलदाता ईश्वर के रूप में यह वाक्य कह रहे हैं? मैं उन्हें आसुरी योनियों में गिराता हूँ। मनुष्य अपनी स्वेच्छा से शुभाशुभ कर्म करता है और उसे कर्म के नियमानुसार ईश्वर फल प्रदान करता है। अत इस फल प्राप्ति में ईश्वर पर पक्षपात का आरोप नहीं किया जा सकता। उदाहरणार्थ? जब एक न्यायाधीश अपराधियों को कारावास या मृत्युदण्ड देता है? तो उसे पक्षपाती नहीं कहा जाता? क्योंकि वह तो केवल विधि के नियमों के अनुसार ही अपना निर्णय देता है। इसी प्रकार? आसुरी भाव के मनुष्य अपनी निम्नस्तरीय वासनाओं से प्रेरित होकर जब दुष्कर्म करते हैं? तब उन्हें उनके स्वभाव के अनुकूल ही बारम्बार अासुरी योनियों में जन्म मिलता है। यहाँ इंगित किये गये पुनर्जन्म के सिद्धांत का एकाधिक स्थलों पर विस्तृत विवेचन किया जा चुका है।और

English Translation By Swami Sivananda

Those cruel haters, worst among men in the world, I hurl those evil-doers into the wombs of demons only.

Transliteration

tān ahaṃ dviṣataḥ krūrān saṃsāreṣu narādhamān
kṣipāmy ajasram aśubhān āsurīṣv eva yoniṣu

अनुवाद

उन द्वेष करने वाले, क्रूर और अपवित्र मनुष्यों में सबसे नीच लोगों को मैं संसार में निरंतर आसुरी योनियों में ही गिराता हूँ

भावार्थ

इस श्लोक में भगवान कृष्ण आसुरी स्वभाव वाले मनुष्यों के अंतिम परिणाम का वर्णन कर रहे हैं। जो लोग दूसरों से द्वेष करते हैं, क्रूर कर्मों में लिप्त रहते हैं और अधर्मी हैं, वे मानव जाति में सबसे अधम माने जाते हैं। भगवान उन्हें बार-बार संसार चक्र में आसुरी और नीच योनियों (जैसे पशु, पक्षी या क्रूर मनुष्यों के रूप में) में ही भेजते हैं ताकि वे अपने कर्मों का फल भोग सकें।

Translation

Those envious, cruel, and impure, who are the lowest of mankind, I perpetually cast into demoniac wombs in the cycle of rebirth

Meaning

In this verse, Lord Krishna describes the ultimate fate of those possessing a demoniac nature. Those who are envious, cruel, and impure are considered the lowest among human beings. The Lord perpetually casts these degraded souls into demoniac and lower species of life within the cycle of material existence, where they continue to reap the fruits of their sinful actions.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
तान्उन
अहम्मैं
द्विषतःद्वेष करने वालों को
क्रूरान्क्रूरों को
संसारेषुसंसार चक्रों में
नराधमान्मनुष्यों में नीच
क्षिपामिफेंकता हूँ (गिराता हूँ)
अजस्रम्निरंतर
अशुभान्अशुभ (अपवित्र) लोगों को
आसुरीषुआसुरी
एवही
योनिषुयोनियों में

Word by word

WordMeaning
tānthose
ahamI
dviṣataḥthe envious
krūrānthe cruel
saṃsāreṣuin the cycles of material existence
narādhamānthe lowest of mankind
kṣipāmiI cast
ajasramperpetually
aśubhānthe impure / inauspicious
āsurīṣuinto demoniac
evacertainly
yoniṣuwombs