श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग

Bhagavad Gita 16.11

मूल श्लोक :

चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः
कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्िचताः

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

वे मृत्युपर्यन्त रहनेवाली अपार चिन्ताओंका आश्रय लेनेवाले? पदार्थोंका संग्रह और उनका भोग करनेमें ही लगे रहनेवाले और जो कुछ है? वह इतना ही है -- ऐसा निश्चय करनेवाले होते हैं।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

चिन्ता और व्याकुलता से ग्रस्त ये हतोत्साहित लोग अपने निरर्थक उद्यमों के जीवन को दुख के गलियारे से खींचते हुए मृत्यु के आंगन में ले आते हैं। सामान्य जीवन में? ये चिन्ताएं शान्ति और आनन्द के दुर्ग पर टूट पड़ती हैं और विशेष रूप से तब? जब शक्तिशाली कामनाओं ने मनुष्य को जीतकर अपने वश में कर लिया होता है। अपनी इष्ट वस्तुओं को प्राप्त करने (योग) के लिए परिश्रम और संघर्ष तथा प्राप्त की गयी वस्तुओं के रक्षण (क्षेम) की व्याकुलता? यही मनुष्य जीवन की चिन्ताएं होती हैं। जीवन पर्यन्त की कालावधि केवल इन्हीं चिन्ताओं में अपव्यय करना और अन्त में? यही पाना कि हम उसमें कितने दयनीय रूप से विफल हुए हैं? वास्तव में एक बड़ी त्रासदी है।कामोपभोगपरमा  सत्कार्य के क्षेत्र में हो या दुष्कृत्य के क्षेत्र में? मनुष्य को निरन्तर कार्यरत रहने के लिए किसी दर्शन (जीवन विषयक दृष्टिकोण) की आवश्यकता होती है? जिसके बिना उसके प्रयत्न असंबद्ध? हीनस्तर के और निरर्थक होते हैं।आसुरी स्वभाव के लोगों का जीवनदर्शन निरपवादरूप से सर्वत्र एक समान ही होता है। इस श्लोक में चार्वाक मत (नास्तिक दर्शन) को इंगित किया गया है। इस मत के अनुसार काम ही मनुष्य जीवन का परम पुरषार्थ है? अन्य धर्म या मोक्ष कुछ नहीं।इतना ही है  सामान्यत? ये भौतिकतावादी मूर्ख नहीं होते? परन्तु वे अत्यन्त स्थूल बुद्धि और सतही दृष्टि से विचार करते हैं। वे यह अनुभव करते हैं कि केवल विषय भोग का जीवन दुखपूर्ण होता है? और इसमें क्षुद्र लाभ के लिये मनुष्य को अत्यधिक मूल्य चुकाना पड़ता है। फिर भी? वे अपनी अनियंत्रित कामवासना को ही तृप्त करने में रत और व्यस्त रहते हैं। उनसे यदि इस विषय में प्रश्न पूछा जाये? तो उनका उत्तर होगा कि यह संघर्ष ही जीवन है। वह सुख और शान्तिमय जीवन को जानते ही नहीं है। वे प्राय निराशावादी होते हैं और नैतिक दृष्टि से जीवन विषयक गंभीर विचार करने से कतराते हैं। फलत उनमें आत्महत्या और नर हत्या की प्रवृत्तियाँ भी देखी जा सकती हैं। उनकी धारणा यह होती है कि चिन्ता और दुख से ही जीवन की रचना हुई है। जीवन के सतही असामञ्जस्य और विषमताओं के पीछे जो सामञ्जस्य और लय है? उसे वह पहचान नहीं पाते। भविष्य में कोई आशा की किरण न देखकर उनका हृदय कटुता से भर जाता है और फिर उनका जीवन मात्र प्रतिशोधपूर्ण हो जाता है। निष्फल परिश्रम में वे अपनी शक्तियों का अपव्यय करते हैं और अन्त में थके? हारे और निराश होकर दयनीय मृत्यु को प्राप्त होते हैं।उपर्युक्त जीवन दर्शन की अभिव्यक्ति को अगले श्लोक में बताते हुये भगवान् कहते हैं

English Translation By Swami Sivananda

Giving themselves over to immeasurable cares ending only with death, regarding gratification of lust as their highest aim, and feeling sure that that is all.

Transliteration

cintāmaparimeyāṃ ca pralayāntāmupāśritāḥ
kāmopabhogaparamā etāvaditi niścītāḥ

अनुवाद

और वे प्रलय के अंत तक रहने वाली असीमित चिंताओं का आश्रय लिए हुए, विषय-भोगों को ही परम पुरुषार्थ मानने वाले तथा ‘बस यही सब कुछ है’ ऐसा निश्चय रखने वाले होते हैं

भावार्थ

इस श्लोक में आसुरी प्रवृत्ति के मनुष्यों की मानसिक स्थिति का वर्णन किया गया है। वे जीवन भर अनंत चिंताओं से घिरे रहते हैं जो केवल मृत्यु के साथ ही समाप्त होती हैं। उनके लिए इंद्रिय-तृप्ति ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य होता है और वे मानते हैं कि इस भौतिक संसार के सुखों के अतिरिक्त और कुछ भी सत्य नहीं है।

Translation

And, taking refuge in immeasurable cares ending only with death, regarding the gratification of desires as their highest aim, feeling sure that this is all

Meaning

This verse describes the mental state of those with demoniac qualities. They are burdened with endless anxieties that persist until their death. For them, the gratification of sensory desires is the ultimate goal of life, and they firmly believe that there is nothing beyond this material existence.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
चिन्ताम्चिंता को
अपरिमेयाम्असीमित
और
प्रलय-अन्ताम्मृत्यु के समय तक रहने वाली
उपाश्रिताःशरण लिए हुए
काम-उपभोगइंद्रिय-भोग को
परमाःपरम लक्ष्य मानने वाले
एतावत्इतना ही (सब कुछ है)
इतिऐसा
निश्चिताःनिश्चय किए हुए

Word by word

WordMeaning
cintāmanxiety
aparimeyāmimmeasurable
caand
pralaya-antāmending only with death
upāśritāḥhaving taken refuge in
kāma-upabhogagratification of desires
paramāḥas the highest goal
etāvatthis is all
itithus
niścitāḥconvinced