Chapter 14 · गुणत्रयविभागयोग
Bhagavad Gita 14.10
मूल श्लोक :
रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत
रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथाHindi Translation By Swami Ramsukhdas
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन रजोगुण और तमोगुणको दबाकर सत्त्वगुण? सत्त्वगुण और तमोगुणको दबाकर रजोगुण? वैसे ही सत्त्वगुण और रजोगुणको दबाकर तमोगुण बढ़ता है।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
पूर्वोक्त विवेचन के सन्दर्भ में एक बुद्धिमान् साधक की यह जिज्ञासा होगी कि क्या ये तीन गुण अपना कार्य भिन्नभिन्न समय पर किसी क्रम विशेष में अथवा एक ही समय में सब कार्य करते हैं। यदि एक ही साथ तीनों कार्य करते हैं? तो क्या इनमें सामंजस्य होता है या विरोध इस प्रकार के प्रश्न का पूर्वानुमान करके भगवान् श्रीकृष्ण अपने दिव्यगान के इस श्लोक में इसका उत्तर देते हैं। वे वर्णन करते हैं कि किस प्रकार ये गुण भिन्नभिन्न समय पर कार्य करते हैं। प्रत्येक गुण उस क्षणविशेष तक प्रमुख और शक्तिशाली बन जाता है।विचारपूर्वक अध्ययन करने पर ज्ञात होगा कि समयसमय पर किसी एक गुण की अधिकता से प्रभावित होकर मनुष्य कार्य कर रहा होता है। उस दशा में अन्य दो गुणों का सर्वथा अभाव नहीं होता? किन्तु उनका महत्व गौण हो जाता है। जब हम कहते हैं कि कोई पुरुष सत्त्वगुण के प्रभाव में है? तब उसका अर्थ यह होता है कि उस समय उसमें रजोगुण और तमोगुण इतने अधिक प्रबल नहीं होते कि वे अपने प्रभाव को व्यक्त कर सकें। यही बात अन्य गुणों के विषय में भी समझनी चाहिये।वर्धमान गुण के लक्षण को हम किस प्रकार पहचान सकते हैं भगवान् बताते हैं
English Translation By Swami Sivananda
Now Sattva arises (prevails), O Arjuna, having overpowered Rajas and Tamas; nor Rajas, having overpowered Sattva and Tamas; and now Tamas, having overpowered Sattva and Rajas.
Transliteration
rajas tamaś cābhibhūya sattvaṃ bhavati bhārata
rajaḥ sattvaṃ tamaś caiva tamaḥ sattvaṃ rajas tathāअनुवाद
हे भरतवंशी अर्जुन! रजोगुण और तमोगुण को दबाकर सत्त्वगुण बढ़ता है, वैसे ही सत्त्वगुण और तमोगुण को दबाकर रजोगुण बढ़ता है, तथा सत्त्वगुण और रजोगुण को दबाकर तमोगुण बढ़ता है।
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण समझाते हैं कि प्रकृति के तीनों गुण (सत्त्व, रज, और तम) निरंतर एक-दूसरे पर हावी होने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। जब एक गुण प्रबल होता है, तो वह अन्य दो गुणों को दबा देता है। मनुष्य के भीतर किस गुण की प्रधानता होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस गुण को बढ़ावा देता है।
Translation
O descendant of Bharata, goodness arises by overcoming passion and ignorance; passion arises by overcoming goodness and ignorance; and ignorance arises by overcoming goodness and passion.
Meaning
In this verse, Lord Krishna explains that the three modes of material nature (goodness, passion, and ignorance) are constantly competing for dominance. When one mode becomes prominent, it suppresses the other two. A person’s mental state and behavior are determined by whichever mode is currently prevailing over the others.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रजः | रजोगुण को |
| तमः | तमोगुण को |
| च | और |
| अभिभूय | दबाकर |
| सत्त्वम् | सत्त्वगुण |
| भवति | होता है (प्रबल होता है) |
| भारत | हे भरतवंशी अर्जुन |
| रजः | रजोगुण (बढ़ता है) |
| सत्त्वम् | सत्त्वगुण को |
| तमः | और तमोगुण को (दबाकर) |
| च | और |
| एव | ही |
| तमः | तमोगुण (बढ़ता है) |
| सत्त्वम् | सत्त्वगुण को |
| रजः | और रजोगुण को (दबाकर) |
| तथा | वैसे ही |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| rajaḥ | passion |
| tamaḥ | ignorance |
| ca | and |
| abhibhūya | overcoming |
| sattvam | goodness |
| bhavati | becomes (prominent) |
| bhārata | O descendant of Bharata |
| rajaḥ | passion (becomes prominent) |
| sattvam | goodness |
| tamaḥ | and ignorance (overcoming) |
| ca | and |
| eva | indeed |
| tamaḥ | ignorance (becomes prominent) |
| sattvam | goodness |
| rajaḥ | and passion (overcoming) |
| tathā | thus |