श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 13 · क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग

Bhagavad Gita 13.14

मूल श्लोक :

सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम्
सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

वे (परमात्मा) सब जगह हाथों और पैरोंवाले? सब जगह नेत्रों? सिरों और मुखोंवाले तथा सब,जगह कानोंवाले हैं। वे संसारमें सबको व्याप्त करके स्थित हैं।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

सर्वत पाणिपादम्  उत्तम अधिकारी तो आत्मा के निर्गुण स्वरूप को पहचान लेता है? परन्तु मध्यम अधिकारी को अज्ञात और अव्यक्त का बोध? ज्ञात और व्यक्त वस्तुओं के द्वारा कराने में सरलता होती है। यद्यपि प्रणियों के हाथ और पैर जड़ तत्त्व के बने हैं? तथापि वे चेतन और कार्यक्षम प्रतीत हो रहे हैं। इन सबके पीछे इन्हें चेतनता प्रदान करने वाला आत्मतत्त्व सर्वत्र एक ही है। इसीलिए यहाँ कहा गया है कि ब्रह्म समस्त हाथ और पैरों को धारण करने वाला है।इसी प्रकार? समस्त नेत्र? शिर और मुख भी इस चैतन्य के कारण ही स्वव्यापार करने में समर्थ होते हैं। इसलिए आत्मा का निर्देश इस प्रकार करते हैं कि वह सब ओर नेत्र? शिर और मुख वाला है। चैतन्य से धारण किये होने पर ही प्राणियों में विषय ग्रहण तथा विचार करने की क्रियाएं होती रहती हैं। अत चैतन्य ब्रह्म सब ओर से श्रोत वाला कहा गया है।यह सबको व्याप्त करके स्थित है  यहाँ जब आत्मा के उपाधियुक्त स्वरूप और प्रभाव को दर्शाया गया है? तो कोई यह मान सकता है कि जहाँ उपाधियाँ हैं? वहीं पर आत्मा का अस्तित्व है और अन्यत्र नहीं। इस प्रकार की विपरीत धारणा को दूर करने के लिए यहाँ पर अत्यन्त उचित ही कहा गया है कि वह परम सत्य सबको व्याप्त करके स्थित है। यह श्लोक वैदिक साहित्य से परिचित विद्यार्थियों को ऋग्वेद के प्रसिद्ध पुरुषसूक्तम् का स्मरण कराता है।भगवान् आगे कहते हैं

English Translation By Swami Sivananda

With hands and feet everywhere, with eyes, heads and mouths everywhere, with ears everywhere, He exists in the worlds enveloping all.

Transliteration

sarvataḥ pāṇipādaṃ tat sarvato'kṣiśiromukham
sarvataḥ śrutimal loke sarvam āvṛtya tiṣṭhati

अनुवाद

वह सब ओर हाथ और पैर वाला है, सब ओर आँख, सिर और मुख वाला है, तथा सब ओर कान वाला है; वह संसार में सब कुछ व्याप्त करके स्थित है।

भावार्थ

इस श्लोक में ज्ञेय ब्रह्म (परमात्मा) के सर्वव्यापी स्वरूप का वर्णन किया गया है। परमात्मा निराकार होते हुए भी सभी जीवों के अंगों के माध्यम से कार्य करता है, इसलिए उसके हाथ, पैर, आँखें और कान हर जगह कहे गए हैं। वह संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त होकर स्थित है।

Translation

That has hands and feet everywhere, eyes, heads, and faces everywhere, and ears everywhere; It exists in the world, pervading everything.

Meaning

This verse describes the all-pervading nature of the Supreme Brahman (the object of knowledge). Although formless, the Divine functions through the senses and limbs of all living beings, and is thus described as having hands, feet, eyes, and ears everywhere. It exists pervading the entire universe.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
सर्वतःसब ओर
पाणिहाथ
पादम्और पैर वाला
तत्वह (परम तत्त्व)
सर्वतःसब ओर
अक्षिआँख
शिरःसिर
मुखम्और मुख वाला
सर्वतःसब ओर
श्रुतिमत्कान वाला
लोकेसंसार में
सर्वम्सबको
आवृत्यव्याप्त करके
तिष्ठतिस्थित है

Word by word

WordMeaning
sarvataḥeverywhere
pāṇihands
pādamand feet
tatthat (Brahman)
sarvataḥeverywhere
akṣieyes
śiraḥheads
mukhamand faces
sarvataḥeverywhere
śrutimathaving ears
lokein the world
sarvameverything
āvṛtyapervading
tiṣṭhatiexists