श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 11 · विश्वरूपदर्शनयोग

Bhagavad Gita 11.7

मूल श्लोक :

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्
मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

हे नींदको जीतनेवाले अर्जुन मेरे इस शरीरके एक देशमें चराचरसहित सम्पूर्ण जगत्को अभी देख ले। इसके सिवाय तू और भी जो कुछ देखना चाहता है? वह भी देख ले।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

प्रथम तो भगवान् उत्साही साधक के साहसी मन को इसके लिए प्रशिक्षित करते हैं कि उसमें जानने की उत्सुकता रूपी अक्षय धन का विकास हो। तत्पश्चात् उनका प्रयत्न है कि यह उत्सुकता तीव्र उत्कण्ठा या जिज्ञासा में परिवर्तित हो जाये। इसके लिए ही वे विश्वरूप में दर्शनीय रूपों का उल्लेख करते हैं। इस युक्ति से साधक का मन पूर्ण उत्कटता से एक ही स्थान पर केन्द्रित हो जाता है। यही इस श्लोक का प्रयोजन है। ध्यानपूर्वक इस श्लोक पर विचार करने से ज्ञात होगा कि यहाँ व्यासजी ने भक्तिशास्त्र में वर्णित भक्ति की रूपरेखा दी है।इहैकस्थम् का अर्थ है यहाँ इसी एक स्थान पर। इन शब्दों के द्वारा श्रीकृष्ण सम्पूर्ण चराचर (जड़ चेतन) जगत को अपने शरीर में दर्शाते हैं। श्रीकृष्ण स्वयं ही इह शब्द को स्पष्ट करते हुए कहते हैं? मेरे शरीर में। सम्पूर्ण चराचर सहित भौतिक जगत् को दबाकर श्रीकृष्ण की देहाकृति में स्थित हुआ दिखलाना था। जैसा कि हम इस अध्याय की प्रस्तावना में देख चुके हैं कि अर्जुन के मन से देश की कल्पना को सर्वथा मुक्त नहीं किया गया था? किन्तु केवल भगवान् श्रीकृष्ण के परिच्छिन्न देह के तुल्य समष्टि आकाश की कल्पना को उसके मन में शेष रखा था। इस मन के द्वारा जब अर्जुन बाहर देखता है? तो उसे भगवान् के शरीर में ही सम्पूर्ण विश्व अपने व्ाविध विस्तार को यथावत् रखते हुए लघु रूप में दिखाई देता है।यद्यपि चराचर शब्द का अर्थ इतना व्यापक है कि उसके उल्लेख से सम्पूर्ण विश्व का निर्देश हो जाता है? किन्तु फिर भी अर्जुन का उत्साह बढ़ाने के लिए वे कहते हैं? और भी जो कुछ तुम देखना चाहते हो? उसे भी देखो। मानव के विशिष्ट स्वभाव के अनुसार अर्जुन का मन अपनी तात्कालिक समस्याओं से चिन्तातुर था? अत स्वाभाविक ही है कि उसकी उत्सुकता भविष्य की घटनाओं को जानने की थी। प्रारम्भ मे उसका प्रयत्न समस्या के समाधान को देखने के लिए अधिक था और अनेकता में व्याप्त एकत्व का साक्षात्कार करने के लिए कम।विभूतियोग के अध्याय में एक परमात्मा को सब में दिखाया गया था? और यहाँ सब को एक परमात्मा में दिखाया जानेवाला है

English Translation By Swami Sivananda

Now behold, O Arjuna, in this, My body, the whole universe centred in one  including the moving and the unmoving  and whatever else thou desirest to see.

Transliteration

ihaikasthaṃ jagat kṛtsnaṃ paśyādya sacarācaram
mama dehe guḍākeśa yaccānyad draṣṭum icchasi

अनुवाद

हे गुडाकेश (अर्जुन)! आज मेरे इस शरीर में एक ही स्थान पर स्थित चराचर सहित सम्पूर्ण ब्रह्मांड को देख लो, और इसके अतिरिक्त जो कुछ भी तुम देखना चाहते हो, उसे भी देख लो।

भावार्थ

भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने दिव्य विश्वरूप का दर्शन करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। वे अर्जुन से कहते हैं कि वे उनके शरीर के एक ही अंश में समस्त चराचर जगत को देख सकते हैं। इसके साथ ही, अर्जुन भविष्य की घटनाओं या अपनी जिज्ञासा के अनुसार जो कुछ भी देखना चाहते हैं, वह सब इस रूप में प्रत्यक्ष देख सकते हैं।

Translation

O Gudakesha (Arjuna)! Behold today, concentrated in one place within My body, the entire universe with all its moving and non-moving beings, and whatever else you desire to see.

Meaning

Lord Krishna invites Arjuna to behold His divine cosmic form. He tells Arjuna that the entire universe, with all its moving and stationary entities, is gathered together in one place within His body. Furthermore, Arjuna is granted the vision to see whatever else he wishes to see, including future events or any other curiosity.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
इहयहाँ (इस शरीर में)
एकस्थम्एक स्थान पर स्थित
जगत्जगत को
कृत्स्नम्सम्पूर्ण
पश्यदेखो
अद्यआज
स-चर-अचरम्चर और अचर सहित
मममेरे
देहेशरीर में
गुडाकेशहे अर्जुन (नींद को जीतने वाले)
यत्जो
चऔर
अन्यत्दूसरा कुछ
द्रष्टुम्देखने के लिए
इच्छसितुम चाहते हो

Word by word

WordMeaning
ihahere (in this body)
ekasthamconcentrated in one place
jagatthe universe
kṛtsnamentire
paśyabehold
adyatoday
sa-cara-acaramwith the moving and the non-moving
mamamy
dehein the body
guḍākeśaO Arjuna (conqueror of sleep)
yatwhatever
caand
anyatother
draṣṭumto see
icchasiyou wish