श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 11 · विश्वरूपदर्शनयोग

Bhagavad Gita 11.46

मूल श्लोक :

किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त     मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव
तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन      सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

(टिप्पणी प0 607) मैं आपको वैसे ही किरीटधारी? गदाधारी और हाथमें चक्र लिये हुए देखना चाहता हूँ। इसलिये हे सहस्रबाहो विश्वमूर्ते आप उसी चतुर्भुजरूपसे हो जाइये।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

यहाँ अर्जुन अपनी इच्छा को स्पष्ट शब्दों में प्रदर्शित करता है कि? मैं आपको पूर्ववत् देखना चाहता हूँ। वह भगवान् के विराट् रूप को देखकर भयभीत हो गया है? जो उन्होंने सम्पूर्ण विश्व के साथ अपने एकत्व को दर्शाने के लिए धारण किया था।वेदान्त द्वारा प्रतिपादित निर्गुण? निराकार तत्त्व या समष्टि के सिद्धांत का जब प्रत्यक्ष अनुभव किया जाता है? तो विरले लोगों में ही वह बौद्धिक धारणाशक्ति होती है कि वे उस सत्य को उसकी पूर्णता में समझकर उसका ध्यान कर सकते हैं। यदि कभी बुद्धि उसे धारण कर भी पाती है? तो प्राय भक्त का हृदय उसके साथ अधिक काल तक तादात्म्य नहीं बनाये रख पाता है। मन के स्तर पर सत्य को केवल रूपकों के द्वारा ही समझकर उसका आनन्द अनुभव किया जा सकता है? सीधे ही उसके पूर्ण वैभव के द्वारा कभी नहीं।इस श्लोक में अर्जुन भगवान् वासुदेव के सौम्य रूप को बताता है? जो  भागवत के भगवान् विष्णु का पारम्परिक रूप है। सब पुराणों में ईश्वर का वर्णन रूपक की भाषा में करते हुए उसे चतुर्भुज के रूप में चितित्र किया गया है। शरीर शास्त्र के विद्यार्थियों को यह कोई प्रकृति की आसाधारण निर्मिति ही प्रतीत हो सकती है। हम भूल जाते हैं कि वास्तव में यह सत्य का केवल एक सांकेतिक रूपक है।भगवान् की ये चार भुजाएं अन्तकरण चतुष्टय अर्थात् मन? बुद्धि? चित्त और अहंकार के प्रतीक हैं।पुराणों में ही चतुर्भुजधारी भगवान् का वर्ण नील कहा गया है तथा वे पीताम्बरधारी हैं अर्थात् वे पीत वस्त्र धरण किये हुए हैं। नीलवर्ण से अभिप्राय उनकी अनन्तता से है असीम वस्तु सदा नीलवर्ण प्रतीत होती है? जैसे ग्रीष्म ऋतु का निरभ्र आकाश अथवा गहरा सागर। पृथ्वी का वर्ण है पीत। इस प्रकार भगवान् विष्णु के रूप का अर्थ यह हुआ कि अनन्त परमात्मा परिच्छिन्नता को धारण कर अन्तकरण चतुष्टय के द्वारा जीवन का खेल खेलता है।यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि सभी धर्मों में ईश्वर का वर्णन एक ही प्रकार से किया गया है। वह परमेश्वर सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान् है। ईश्वर के बाहुबल से ही मनुष्य सफलता प्राप्त करता है? इसलिए सर्वशक्तिमान् भगवान् का निर्देश चतुर्भुजधारी के रूप में ही किया जा सकता है। भगवान् विष्णु शंखचक्रगदापद्मधारी हैं। शंखनाद के द्वारा भगवान् सब को अपने समीप आने का आह्वान करते हैं। यदि मनुष्य अपने हृदय के श्रेष्ठ भावनारूपी शंखनाद को अनसुना कर देता है? तो दुख के रूप में उस पर गदा का आघात होता है। इतने पर भी यदि मनुष्य अपने में सुधार नहीं लाता है? तो अन्तिम परिणाम है चक्र के द्वारा शिरच्छेद अर्थात् परमपुरुषार्थ की अप्राप्ति रूप नाश। इसके विपरीत? यदि कोई मनुष्य दिव्य जीवन का आह्वान सुनकर उसका पूर्ण अनुकरण करता है? तो उसे पद्म अर्थात् कमल की प्राप्ति होती है। हिन्दू धर्म में कमल पुष्प आध्यात्मिक पूर्णता एव शान्ति का प्रतीत है। भारतीय संस्कृति में यह सुखसमृद्धि का भी प्रतीक है। पाश्चात्य देशों में शान्ति का प्रतीक शुभ्र कपोत माना जाता है।संक्षेप में? अर्जुन चाहता है कि भगवान् अपने सौम्यरूप और शान्तभाव में प्रकट हों। वेदान्त के प्रारम्भिक और नवदीक्षित विद्यार्थियों के लिए सतत सूक्ष्म दार्शनिक विचारों की गति बनाये रख पाना कठिन होता है। बुद्धि की ऐसी थकान भरी अवस्था में? उत्साही साधकों के लिए ऐसे विश्वसनीय विश्रामस्थल की आवश्यकता होती है? जहाँ विश्राम करके वे पुन नवचैतन्य से युक्त हो सकते हों। यह शान्ति की शय्या है  भगवान् का सगुण? साकार और सौम्यरूप।अर्जुन को भयभीत देखकर? भगवान् अपने विराट रूप का उपसंहार करके मधुर वचनों में उसे आश्वस्त करते हुए कहते हैं

English Translation By Swami Sivananda

I desire to see Thee as before, crowned, bearing a mace, with the discus in hand, in Thy former form only, having four arms, O thousand-armed, Cosmic Form (Being).

Transliteration

kirīṭinaṃ gadinaṃ cakrahastam icchāmi tvāṃ draṣṭumahaṃ tathaiva
tenaiva rūpeṇa caturbhujena sahasrabāho bhava viśvamūrte

अनुवाद

मैं आपको वैसे ही मुकुट धारण किए हुए, हाथ में गदा और चक्र लिए हुए देखना चाहता हूँ। हे सहस्रबाहु! हे विश्वरूप! आप अपने उसी चतुर्भुज रूप में प्रकट हो जाइए।

भावार्थ

भगवान कृष्ण के अत्यंत उग्र और असीम विश्वरूप को देखकर अर्जुन भयभीत हो जाते हैं। वे भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वे अपने इस डरावने रूप को समेट लें और अपने सौम्य, मुकुटधारी, गदा और चक्र से सुसज्जित चतुर्भुज रूप में पुनः प्रकट हों, जिससे अर्जुन को शांति मिल सके।

Translation

I wish to see You as before, wearing a crown, holding a mace and a disc in Your hand. O thousand-armed one, O universal form, appear in that same four-armed form.

Meaning

After witnessing the terrifying and boundless universal form of Lord Krishna, Arjuna is filled with fear and awe. He begs the Lord to withdraw this cosmic manifestation and return to His familiar, serene, and beautiful four-armed form, adorned with a crown, mace, and disc.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
किरीटिनम्मुकुट धारण किए हुए को
गदिनम्गदा धारण किए हुए को
चक्र-हस्तम्हाथ में चक्र लिए हुए को
इच्छामिचाहता हूँ
त्वाम्आपको
द्रष्टुम्देखना
अहम्मैं
तथा एववैसे ही
तेन एवउसी
रूपेणरूप से
चतुर्भुजेनचार भुजाओं वाले
सहस्रबाहोहे हजार भुजाओं वाले
भवहो जाइए
विश्वमूर्तेहे विश्वरूप

Word by word

WordMeaning
kirīṭinamone wearing a crown
gadinamone holding a mace
cakra-hastamwith a disc in hand
icchāmiI wish
tvāmYou
draṣṭumto see
ahamI
tathā evajust as before
tena evain that very
rūpeṇaform
caturbhujenafour-armed
sahasrabāhoO thousand-armed one
bhavabecome
viśvamūrteO universal form