Chapter 10 · विभूतियोग
Bhagavad Gita 10.26
मूल श्लोक :
अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिःHindi Translation By Swami Ramsukhdas
सम्पूर्ण वृक्षोंमें पीपल? देवर्षियोंमें नारद? गन्धर्वोंमें चित्ररथ और सिद्धोंमें कपिल मुनि मैं हूँ।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
मैं समस्त वृक्षों में अश्वत्थ वृक्ष हूँ परिमाण और आयुमर्यादा दोनों की दृष्टि से अश्वत्थ अर्थात् पीपलवृक्ष को सर्वव्यापक और नित्य माना जा सकता है? क्योंकि वह प्राय कई शताब्दियों तक जीवित रहता है। हिन्दू लोग उसकी पूजा करते हैं। उसके साथ दिव्यता और पवित्रता की भावना जुड़ी हुई है। वैदिक परम्परा से परिचित लोगों को अश्वत्थ शब्द उपनिषदों में वर्णित संसार वृक्ष के रूपक का स्मरण भी कराता है। गीता के भी आगे आने वाले एक अध्याय में अश्वत्थ वृक्ष का वर्णन मिलता है? जो इस दृश्यमान मिथ्या जगत् का प्रतीक रूप है।मैं देवर्षियों में नारद हूँ देवर्षि नारद हमारी पौराणिक कथाओं के एक प्रिय पात्र हैं। नारद का वर्णन हरिभक्त के रूप में किया गया है। वे न केवल देवर्षियों में महान् हैं? वरन् वे प्राय इस पृथ्वीलोक पर अवतरित होकर लोगों के मन में गर्व अभिमान दूर करने के लिए जानबूझकर उनकी आपस में कलह करवाते हैं और अन्त में सबको भक्ति का मार्ग दर्शाकर स्वर्ग सुख की प्राप्ति कराते हैं। सम्भवत? श्रीकृष्ण स्वयं धर्मोद्धारक और धर्मप्रचारक होने के नाते नारद जी के प्रति उनके प्रचार के उत्साह के कारण आदर भाव रखते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार अनेक अधर्मियों को धर्म मार्ग में परिवर्तित कर नारद जी ने उन्हें मोक्ष दिलाया है। भगवान् श्रीकृष्ण और नारद दोनों की ही समान महत्वाकांक्षा होने से दोनों के मध्य स्नेह होना स्वाभाविक ही है।मैं गन्धर्वों में चित्ररथ हूँ गन्धर्वगण स्वर्ग के गायक वृन्द हैं? जो कला और संगीत के द्वारा देवताओं का मनोरंजन करते हैं। स्वर्ग के मनोरंजन के वे सितारे हैं। उन गन्धर्वों में सर्वश्रेष्ठ हैं चित्ररथ।मैं सिद्धों में कपिल मुनि हूँ ये सिद्ध पुरुष जादूगर नहीं हैं। इस संस्कृत शब्द का अर्थ है जिस पुरुष ने अपने लक्ष्य (साध्य) को सिद्ध (प्राप्त) कर लिया है। अत आत्मानुभवी पुरुष ही सिद्ध कहलाता है। ऐसे सिद्ध पुरुषों में भगवान् कहते हैं कि? मैं कपिल मुनि हूँ। मुनि शब्द से उस पारम्परिक धारणा को बनाने की आवश्यकता नहीं है? जिसमें मुनि को एक बृद्ध? पक्व केश वाले? प्राय निर्वस्त्र और साधारणत अगम्य स्थानों में विचरण करने वाले पुरुष के रूप में अज्ञानी चित्रकारों के द्वारा चित्रित किया जाता है। उसके विषय में ऐसी धारणा प्रचलित हो गई है कि वह एक सामान्य नागरिक के समान न होकर जंगलों का कोई विचित्र प्राणी है? जो विचित्र्ा आहार पर जीता है। वस्तुत मुनि का अर्थ है मननशील अर्थात् तत्त्वचिन्तक पुरुष। वह शास्त्रीय कथनों के गूढ़ अभिप्रायों पर सूक्ष्म? गम्भीर मनन करता है। ऐसे विचारकों में मैं कपिल मुनि हूँ।सांख्य दर्शन के प्रणेता के रूप में कपिल मुनि सुविख्यात हैं? जिनका संकेत यहाँ किया गया है। अनेक सिद्धांतों पर गीता का सांख्य दर्शन के साथ मतैक्य है। अत भगवान् यहाँ कपिल मुनि को अपनी विभूति की सम्मानित प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं।पुन?
English Translation By Swami Sivananda
Among all the trees ( I am) the Peepul; among the divine sages, I am Narada; among Gandharvas, Chitraratha; among the perfected, the sage Kapila.
Transliteration
aśvatthaḥ sarvavṛkṣāṇāṃ devarṣīṇāṃ ca nāradaḥ
gandharvāṇāṃ citrarathaḥ siddhānāṃ kapilo muniḥअनुवाद
सब वृक्षों में पीपल का वृक्ष, देवर्षियों में नारद, गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्धों में कपिल मुनि मैं हूँ
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपनी विभूतियों का वर्णन करते हुए बताते हैं कि वे सभी वृक्षों में पवित्र अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष हैं। वे देवर्षियों में परम ज्ञानी नारद मुनि हैं, गन्धर्वों में चित्ररथ हैं और सिद्ध पुरुषों में सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि हैं। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वोत्तम और दिव्य गुणों से युक्त हैं, जो भगवान की ही महिमा को दर्शाते हैं।
Translation
Among all trees I am the Peepal tree; among the divine sages, Narada; among the Gandharvas, Chitraratha; and among the perfected beings, the sage Kapila
Meaning
In this verse, Lord Krishna continues to describe His divine manifestations, declaring Himself to be the sacred Ashvattha (Peepal) tree among all trees. Among the celestial sages, He is Narada, and among the celestial musicians (Gandharvas), He is Chitraratha. Among the perfected souls who possess natural spiritual accomplishments from birth, He is the great sage Kapila, the author of the Sankhya philosophy.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अश्वत्थः | पीपल का वृक्ष |
| सर्व-वृक्षाणाम् | सब वृक्षों में |
| देव-ऋषीणाम् | देवर्षियों में |
| च | और |
| नारदः | नारद मुनि |
| गन्धर्वाणाम् | गन्धर्वों में |
| चित्ररथः | चित्ररथ |
| सिद्धाणाम् | सिद्धों में |
| कपिलः | कपिल |
| मुनिः | मुनि |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| aśvatthaḥ | the Peepal tree |
| sarva-vṛkṣāṇām | among all trees |
| deva-ṛṣīṇām | among the divine sages |
| ca | and |
| nāradaḥ | Narada |
| gandharvāṇām | among the Gandharvas |
| citrarathaḥ | Chitraratha |
| siddhānām | among the perfected beings |
| kapilaḥ | Kapila |
| muniḥ | the sage |