श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 10 · विभूतियोग

Bhagavad Gita 10.24

मूल श्लोक :

पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम्
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

हे पार्थ पुरोहितोंमें मुख्य बृहस्पतिको मेरा स्वरूप समझो। सेनापतियोंमें स्कन्द और जलाशयोंमें समुद्र मैं हूँ।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

मैं पुरोहितों में बृहस्पति हूँ  गुरु ग्रह के अधिष्ठाता बृहस्पति को ऋग्वेद में ब्रह्मणस्पति कहा गया है? जो स्वर्ग के अन्य देवों में उनके पद को स्वत स्पष्ट कर देता है। देवताओं के वे आध्यात्मिक गुरु माने जाते हैं।मैं सेनापतियों में स्कन्द हूँ  स्कन्द को ही कार्तिक स्वामी के नाम से जाना जाता है? जो भगवान् शिव के पुत्र हैं। उनका वाहन मयूर है तथा हाथ में वे भाला (बरछा) धारण किये रहते हैं।मैं जलाशयों में सागर हूँ  इन समस्त उदाहरणों में एक बात स्पष्ट होती है कि भगवान् न केवल स्वयं के समष्टि या सर्वातीत रूप को ही बता रहे हैं? वरन् अपने व्यष्टि या वस्तु व्यापक स्वरूप को भी। विशेषत? इस श्लोक में निर्दिष्ट उदाहरण देखिये। निसन्देह ही? गंगाजल का समुद्र के जल से कोई संबंध प्रतीत नहीं होता। यमुना? गोदावरी? नर्मदा? सिन्धु या कावेरी? नील? टेम्स या अमेजन  जगत् के विभिन्न सरोवरों का जल? ग्रामों के तालाबों का जल और सिंचाई नहरों का जल? व्यक्तिगत रूप से? स्वतन्त्र हैं? जिनका उस समुद्र से कोई संबंध नहीं है? जो जगत् को आलिंगन बद्ध किये हुए हैं। और फिर भी? यह एक सुविदित तथ्य हैं कि इस विशाल समुद्र के बिना ये समस्त नदियाँ तथा जलाशय बहुत पहले ही सूख गये होते। इसी प्रकार चर प्राणी और अचर वस्तुओं का अपना स्वतन्त्र अस्तित्व प्रतीत होता है? जिसका सत्य के असीम समुद्र से सतही दृष्टि से कोई संबंध प्रतीत न हो? किन्तु भगवान् सूचित करते हैं कि इस सत्य के बिना यह दृश्य जगत् बहुत पहले ही अपने अस्तित्व को मिटा चुका होता।इसी विचार का विस्तार करते हुए कहते हैं

English Translation By Swami Sivananda

And, among the household priests (of kings), O Arjuna, know Me to be the chief, Brihaspati; among the army generals I am Skana; among lakes I am the ocean.
'

Transliteration

purodhasāṃ ca mukhyaṃ māṃ viddhi pārtha bṛhaspatim
senānīnāmahaṃ skandaḥ sarasāmasmi sāgaraḥ

अनुवाद

हे पार्थ! पुरोहितों में मुख्य बृहस्पति मुझे जानो सेनापतियों में मैं स्कन्द हूँ और जलाशयों में मैं समुद्र हूँ

भावार्थ

इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को अपनी विभूतियों का वर्णन करते हुए बताते हैं कि वे पुरोहितों में सबसे श्रेष्ठ देवगुरु बृहस्पति हैं। वे सेनापतियों में कार्तिकेय (स्कन्द) हैं, जो देवसेना के सेनापति हैं। स्थिर जलाशयों में वे विशाल और अगाध समुद्र हैं, जो उनकी अनंतता को दर्शाता है।

Translation

O Partha, know Me to be Brihaspati, the chief among priests Among generals I am Skanda, and among bodies of water I am the ocean

Meaning

In this verse, Lord Krishna describes His divine opulences to Arjuna, identifying Himself as Brihaspati, the chief priest of the demigods. Among military commanders, He is Skanda (Kartikeya), the general of the celestial army. Among reservoirs of water, He is the vast and deep ocean, representing His boundless nature.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
पुरोधसाम्पुरोहितों में
और
मुख्यम्मुख्य (प्रधान)
माम्मुझको
विद्धिजानो
पार्थहे पृथापुत्र (अर्जुन)
बृहस्पतिम्बृहस्पति
सेनानीनाम्सेनापतियों में
अहम्मैं
स्कन्दःस्कन्द (कार्तिकेय)
सरसाम्जलाशयों में
अस्मिहूँ
सागरःसमुद्र

Word by word

WordMeaning
purodhasāmof priests
caand
mukhyaṃthe chief
māṃme
viddhiknow
pārthaO Partha (son of Pritha)
bṛhaspatimBrihaspati
senānīnāmof generals
ahaṃI am
skandaḥSkanda (Kartikeya)
sarasāmof reservoirs of water
asmiI am
sāgaraḥthe ocean