Chapter 10 · विभूतियोग
Bhagavad Gita 10.23
मूल श्लोक :
रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम्
वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम्Hindi Translation By Swami Ramsukhdas
रुद्रोंमें शंकर और यक्षराक्षसोंमें कुबेर मैं हूँ? वसुओंमें पावक (अग्नि) और शिखरवाले पर्वतोंमें मेरु मैं हूँ।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
मैं रुद्रों में शंकर हूँ जीवन का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को नाश के अधिष्ठाता देवता के रूप में रुद्र की कल्पना को भलीभाँति समझना चाहिये। प्रत्येक परवर्ती (आगामी) रचना के पूर्व नाश होना आवश्यक है। फल को स्थान देने के लिए फूल को नष्ट होना पड़ता है और बीज को प्राप्त करने के लिए फल का विनाश आवश्यक है। ये बीज पुन नष्ट होकर पौधे को जन्म देते हैं। इस प्रकार? प्रत्येक प्रगति और विकास के पूर्व रचनात्मक विनाश की एक अखण्ड शृंखला बनी रहती है। इस तथ्य को सूक्ष्मदर्शी तत्त्वचिन्तक ऋषियों ने पहचाना? और ज्ञान की परिपक्वता में निर्भय होकर उन्होंने रचनात्मक विनाश के सुखदायक देवता शंकर को सम्मान दिया और उनका पूजार्चन किया।मैं यक्ष और राक्षसों में कुबेर हूँ स्वर्ग के धन के कोषाध्यक्ष कुबेर कहे जाते हैं। कुबेर शब्द का अर्थ है कुत्सित शरीर वाला। पुराणों में इसका वर्णन इस प्रकार किया गया है कुबेर अत्यन्त कुत्सित राक्षसी प्राणी है? स्थूल एवं ह्रस्व काय? (त्रिपाद) तीन पैरों वाले? विशाल उदर के? लघु मस्तक वाले और जिसके आठ दांत बाहर निकले हुये हैं। स्वर्ग के इस कोषाध्यक्ष की सहायता के लिए उसी के समान कुरूप? भोगवादी और क्रूरचिन्तक यक्ष और राक्षसों की नियुक्ति होती है? जो कोष रक्षा में कुबेर की सहायता करते हैं। यह उल्लेखनीय है कि भारतीय ऋषिगण पूँजीवाद के कितने विरोधी थे कि उन्होंने धनपति कुबेर को अत्यन्त हास्यास्पद और विकृत आकृति वाला इतना कुरूप चित्रित किया है कि हमें हँसी भी नहीं आ सकती।मैं वसुओं में अग्नि हूँ वेदों में आठ वसुओं का वर्णन किया गया है? जो ऋतुओं के अधिष्ठाता देवता हैं। छान्दोग्य उपनिषद् में कहा गया है कि इन वसुओं का मुख अग्नि है। वहाँ? मुख से तात्पर्य अनुभव और भोग के साधन से है। अत? आत्मा ही वह स्रोत है? जहाँ से हमें समस्त ऋतुओं के अनुभव प्राप्त होते हैं।बाह्य प्रकृति में छ ऋतुएँ हैं? तथा दो ऋतुएँ मन की हैं सुख और दुख। इस प्रकार यहाँ आठ ऋतुओं का निर्देश है। बसन्त ऋतु में यदि वियोग के कारण हम दुखी हों? तो उस ऋतु के फूल भी हमारे लिए अश्रुधार बहाते हुए प्रतीत होते हैं जबकि मन में सफलता का पूर्ण आनन्द उमड़ रहा हो तो शरद ऋतु के पर्णहीन वृक्ष भी हमें आनन्द का नृत्य करते प्रतीत होते हैं इस कारण ये दो आन्तरिक ऋतुएँ हैं। इन सबका अनुभव आत्मचैतन्य की उपस्थिति में ही हो सकता है? अन्यथा नहीं।मैं समस्त पर्वतों में मेरु पर्वत हूँ मेरु एक पौराणिक पर्वत है? जिसका प्राचीन हिन्दू भूगोल शास्त्र में विश्व के मध्य बिन्दु के रूप में वर्णन किया गया है। इस पर्वत के ऊपर देवता वास करते हैं और इसके नीचे सप्तद्वीप फैले हुए हैं? जिनसे यह जगत् बना है। मेरु पर्वत की ऊँचाई सात से आठ हजार मील मानी गई है? जिसके शिखर से गंगा सभी दिशाओं में बहती है। इस वर्णन से अनेक विद्वानों का यह मत बना कि यह हिमालय का वर्णन है? जो? निसन्देह ही? अस्वीकार्य नहीं हो सकता। परन्तु हम उसे वस्तुत गूढ़ सांकेतिक भाषा में किया गया तत्त्व का वर्णन मानेंगे। मेरु पर्वत ऐसे प्रभावी स्थान का सूचक है जिसका आधार जम्बू द्वीप में है। जिसके उच्च शिखर से अध्यात्म ज्ञान की गंगा समस्त द्वीपों का कल्याण करने के लिए प्रवाहित होती है।परिचित जगत् की वस्तुओं में आत्मा की प्रतिष्ठा को बताते हुए आगे कहते हैं
English Translation By Swami Sivananda
And, among the Rudras I am Sankara; among the Yakshas and Rakshasas, the Lord of wealth (Kubera); among the Vasus I am Pavaka (fire); and among the (seven) mountains I am the Meru.
Transliteration
rudrāṇāṃ śaṅkaraścāsmi vitteśo yakṣarakṣasām
vasūnāṃ pāvakaścāsmi meruḥ śikhariṇāmahamअनुवाद
रुद्रों में मैं शंकर हूँ और यक्षों तथा राक्षसों में मैं कुबेर हूँ वसुओं में मैं अग्नि हूँ और शिखरवाले पर्वतों में मैं सुमेरु हूँ
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपनी विभूतियों का वर्णन करते हुए बताते हैं कि वे रुद्रों में कल्याणकारी शिव (शंकर) हैं। वे यक्षों और राक्षसों में धन के स्वामी कुबेर हैं। आठ वसुओं में वे पवित्र करने वाली अग्नि हैं और सभी ऊंचे शिखरों वाले पर्वतों में वे सुमेरु पर्वत हैं।
Translation
Of the Rudras I am Shankara, and of the Yakshas and Rakshasas I am Kubera Of the Vasus I am Agni, and of the peaked mountains I am Meru
Meaning
In this verse, Lord Krishna continues to describe His divine opulences, identifying Himself with the most prominent entities in various categories. Among the Rudras, He is Shankara (Shiva); among the Yakshas and Rakshasas, He is Kubera (the lord of wealth). Among the eight Vasus, He is Agni (fire); and among the peaked mountains, He is Mount Meru.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रुद्राणाम् | रुद्रों में |
| शङ्करः | शंकर (शिव) |
| च | और |
| अस्मि | हूँ |
| वित्तेशः | धन का स्वामी (कुबेर) |
| यक्ष-रक्षसाम् | यक्षों और राक्षसों में |
| वसूनामम् | वसुओं में |
| पावकः | अग्नि |
| च | और |
| अस्मि | हूँ |
| मेरुः | सुमेरु पर्वत |
| शिखरिणाम् | शिखरवाले पर्वतों में |
| अहम् | मैं |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| rudrāṇām | of the Rudras |
| śaṅkaraḥ | Shankara (Shiva) |
| ca | and |
| asmi | I am |
| vitteśaḥ | the lord of wealth (Kubera) |
| yakṣa-rakṣasām | of the Yakshas and Rakshasas |
| vasūnām | of the Vasus |
| pāvakaḥ | fire (Agni) |
| ca | and |
| asmi | I am |
| meruḥ | Meru |
| śikhariṇām | of the peaked mountains |
| aham | I |