Chapter 10 · विभूतियोग
Bhagavad Gita 10.22
मूल श्लोक :
वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः
इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतनाHindi Translation By Swami Ramsukhdas
मैं वेदोंमें सामवेद हूँ? देवताओंमें इन्द्र हूँ? इन्द्रियोंमें मन हूँ और प्राणियोंकी चेतना हूँ।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
मैं वेदों में सामवेद हूँ ऋग्वेद का सार ही सामवेद है। चारों वेदों में ऋग्वेद का स्थान सबसे प्रमुख है। सामवेद को छान्दोग्योपनिषद् में सुन्दरता से गौरवान्वित किया गया है। सामवेद में संगीत का विशेष आनन्द भी जुड़ा हुआ है? क्योंकि साम मन्त्रों को सुन्दर राग? सुर और लय में गाया जाता है? जो इस बात के प्रमाण हैं कि संगीत की इस सुन्दर और शक्तिशाली कला को हमारे पूर्वजों ने इतना अधिक विकसित किया था। इस उपमा के सौन्दर्य के द्वारा हम कह सकते हैं कि श्रीकृष्ण संगीत की आत्मा हैं? जैसे ऋग्वेद का सार सामवेद है।मैं देवों में इन्द्र हूँ स्वर्ग के निवासी देवों का राजा वासव इन्द्र है। यह ध्यान देने योग्य बात है कि वैदिक सिद्धान्त के अनुसार यद्यपि रहनसहन का सर्वोच्च स्तर स्वर्ग में है? परन्तु वहाँ भी देवताओं के पदों में श्रेष्ठता और हीनता का तारतम्य होता है। स्वर्ग की प्राप्ति इह लोक में किये गये पुण्य कर्मों के फलस्वरूप होती है और इस कारण जिस पुरुष ने यहाँ अधिक पुण्य अर्जित किया होगा? उसे वहाँ श्रेष्ठतर भोगों की प्राप्ति होगी। इस नियम के अनुसार? उन सब देवों के जीवन की अपेक्षा इन्द्र का जीवन अधिक वैभव? एवं विलासपूर्ण तथा शक्तिशाली और समर्थ होना स्वाभाविक है। देवताओं में इन्द्र मैं हूँ जो अन्य देवों का शासक और नियन्ता है? जिससे कि उनका जीवन सुखी एवं समृद्धशाली होता है।मैं इन्द्रियों में मन हूँ आधिदैविक दृष्टि से जिसे इन्द्र कहते हैं? आध्यात्मिक दृष्टि से वही मन कहलाता है? क्योंकि देव शब्द का अर्थ इन्द्रिय होता है। जैसे इन्द्र देवताओं का राजा है? वैसे ही मन इन्द्रियों का राजा है। मन के बिना इन्द्रियाँ स्वतन्त्र रूप से अपना व्यापार नहीं कर सकती हैं। इसलिये यहाँ कहा गया है कि मैं इन्द्रियों में मन हूँ। जगत् की समस्त सृष्ट वस्तुओं में सर्वाधिक श्रेष्ठ और अद्भुत वस्तु है बुद्धिमत्ता। यह एक ऐसी रहस्यमयी शक्ति है? जिसके विषय में आधुनिक वैज्ञानिक एक अस्पष्ट और काल्पनिक धारणा बनाने के अतिरिक्त कुछ विशेष ज्ञान प्राप्त नहीं कर सके हैं।
English Translation By Swami Sivananda
Among the Vedas I am the Sama-Veda; I am Vasava among the gods; among the senses I am the mind; and I am intelligence among living beings.
Transliteration
vedānāṃ sāmavedo'smi devānāmasmi vāsavaḥ
indriyāṇāṃ manaścāsmi bhūtānāmasmi cetanāअनुवाद
वेदों में मैं सामवेद हूँ, देवताओं में मैं इन्द्र हूँ इन्द्रियों में मैं मन हूँ और जीवित प्राणियों में मैं चेतना हूँ
भावार्थ
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन कर रहे हैं। वे बताते हैं कि वेदों में वे संगीत और उपासना प्रधान सामवेद हैं, और देवताओं में उनके राजा इन्द्र (वासव) हैं। इसी प्रकार, ग्यारह इन्द्रियों में वे सबसे प्रधान ‘मन’ हैं, और सभी जीवित प्राणियों में जीवन का मुख्य लक्षण ‘चेतना’ (प्राण-शक्ति) हैं।
Translation
Of the Vedas I am the Sama Veda; of the demigods I am Indra of the senses I am the mind, and in living beings I am consciousness
Meaning
In this verse, Lord Krishna describes His divine opulences to Arjuna. He explains that among the Vedas, He is the Sama Veda, which is rich in musical melody and devotion; among the demigods, He is Indra, their king. Furthermore, among the senses, He is the mind, which directs them, and in all living beings, He is consciousness, the very force of life.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| वेदानाम् | वेदों में |
| सामवेदः | सामवेद |
| अस्मि | हूँ |
| देवानाम् | देवताओं में |
| अस्मि | हूँ |
| वासवः | इन्द्र (वासव) |
| इन्द्रियाणाम् | इन्द्रियों में |
| मनः | मन |
| च | और |
| अस्मि | हूँ |
| भूतानाम् | जीवों में |
| अस्मि | हूँ |
| चेतना | चेतना (जीवन-शक्ति) |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| vedānām | of the Vedas |
| sāmavedaḥ | the Sama Veda |
| asmi | I am |
| devānām | of the demigods |
| asmi | I am |
| vāsavaḥ | Indra (Vasava) |
| indriyāṇām | of the senses |
| manaḥ | the mind |
| ca | and |
| asmi | I am |
| bhūtānām | of living beings |
| asmi | I am |
| cetanā | consciousness |