श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 10 · विभूतियोग

Bhagavad Gita 10.21

मूल श्लोक :

आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान्
मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

(टिप्पणी प0 556.1) मैं अदितिके पुत्रोंमें विष्णु (वामन) और प्रकाशमान वस्तुओंमें किरणोंवाला सूर्य हूँ। मैं मरुतोंका तेज और नक्षत्रोंका अधिपति चन्द्रमा हूँ।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

मैं आदित्यों में विष्णु हूँ  वैदिक परम्परा में आदित्यों का संख्या कहीं पाँच तो कहीं छ बतायी गई है। ये अदिति के पुत्र थे। तत्पश्चात् पारम्परिक विश्वास के अनुसार इनकी संख्या बारह मानी गई? जो बारह मासों के सूचक हैं। विष्णु पुराण के अनुसार विष्णु नामक एक आदित्य है? जो अन्य आदित्यों की अपेक्षा श्रेष्ठ और महत्त्वपूर्ण है।मैं ज्योतियों में सूर्य हूँ आधुनिक भौतिक विज्ञान भी सूर्य को समस्त ऊर्जाओं के स्रोत के रूप में स्वीकार करता है। अत भगवान् के कथन का अभिप्राय स्वत स्पष्ट हो जाता है। जहाँ कहीं भी कोई ऊर्जा व्यक्त होती है? उसका स्रोत आत्मा ही है।मैं वायु देवताओं में मरीचि हूँ वायु के अधिष्ठाता देवता मरुत कहलाते हैं? जिनकी संख्या उनचास कही गई है। इन में मरीचि नामक मरुत मैं हूँ। मरुतगण रुद्र पुत्र माने गये हैं। ऋग्वेद के अनुसार मरीचि उनमें प्रमुख है। मैं नक्षत्रों में चन्द्रमा हूँ  भारतीय खगोलशास्त्र में जिस अर्थ में नक्षत्र शब्द प्रयुक्त किया जाता है? वह चन्द्रमा के मार्ग के तीन तारों का सूचक है। इस दृष्टि से? विश्व में चन्द्रमा का यह मार्ग भगवान् की विभूति की ही एक अभिव्यक्ति है और चन्द्रमा उनमें सर्वश्रेष्ठ है? क्योंकि वह नियन्त्रक और नियामक है तथा तेज में भी अपूर्व है।परन्तु हम नक्षत्र शब्द से सामान्य प्रचलित अर्थ को भी स्वीकार कर सकते हैं? जिसके अनुसार रात्रि के समय आकाश में जड़े हुए छोटेछोटे चमकते हुए असंख्य तारे ही नक्षत्र हैं। कुछ व्याख्याकार एक पग आगे जाकर कहते हैं कि नक्षत्र शब्द रात्रि के समस्त प्रकाशों का सूचक है। चिन्तन के लिए उपयोगी होने से यह अर्थ भी स्वीकार्य हो सकता है। रात्रि के समय एक छोटी सी कुटिया से लेकर संसद भवन तक को चमकाने वाले चन्द्रमा का प्रकाश शीतल शान्तिप्रद और गौरवमय होता है। ठीक उसी प्रकार आत्मा का प्रकाश भी अतुलनीय है।यहाँ बाइस श्लोकों की इस मालिका में? भगवान् श्रीकृष्ण कुल पचहत्तर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य ज्ञानयोग के मार्ग पर चलने वाले साधक की सहायता करना है। यहाँ उक्त उपासनाओं के द्वारा साधकगण अपने मनबुद्धि को सुगठित करके चित्त की एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान के लिए उपयोगी ये पचहत्तर अभ्यास हैं

English Translation By Swami Sivananda

Among the (twelve) Adityas, I am Vishnu; among luminaries, the radiant sun; I am Marichi among the (seven or forty-nine) Maruts; among stars the moon am I.

Transliteration

ādityānāmahaṃ viṣṇurjyotiṣāṃ raviraṃśumān
marīcirmarutāmasmi nakṣatrāṇāmahaṃ śaśī

अनुवाद

आदित्यों में मैं विष्णु हूँ, ज्योतियों में मैं प्रकाशमान सूर्य हूँ, मरुतों में मैं मरीचि हूँ और नक्षत्रों में मैं चन्द्रमा हूँ।

भावार्थ

इस श्लोक में भगवान कृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन आरम्भ करते हैं। वे बताते हैं कि समस्त आदित्यों (अदिति के पुत्रों) में वे विष्णु हैं, जो सबसे प्रमुख हैं। प्रकाश देने वाले पिंडों में वे सूर्य हैं और वायु के देवताओं (मरुतों) में वे मरीचि हैं, तथा रात्रि के नक्षत्रों में वे चन्द्रमा हैं।

Translation

Of the Ādityas I am Viṣṇu; of luminaries I am the radiant Sun; of the Maruts I am Marīci; and among the stars I am the Moon.

Meaning

In this verse, Lord Kṛṣṇa begins describing His divine opulences. He identifies Himself as Viṣṇu among the twelve Ādityas, who is the most prominent among them. Among all luminous bodies, He is the radiant Sun, among the storm-gods (Maruts) He is Marīci, and among the night-stars He is the Moon.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
आदित्यानाम्आदित्यों में
अहम्मैं
विष्णुःविष्णु
ज्योतिषाम्ज्योतियों (प्रकाश करने वालों) में
रविःसूर्य
अंशुमान्किरणों वाला (तेजस्वी)
मरीचिःमरीचि
मरुताम्मरुतों (वायुदेवों) में
अस्मिहूँ
नक्षत्राणाम्नक्षत्रों में
अहम्मैं
शशीचन्द्रमा

Word by word

WordMeaning
ādityānāmof the Ādityas
ahamI
viṣṇuḥViṣṇu
jyotiṣāmof luminaries
raviḥthe sun
aṃśumānradiant
marīciḥMarīci
marutāmof the Maruts
asmiI am
nakṣatrāṇāmof the stars
ahamI
śaśīthe moon