श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 1 · अर्जुनविषादयोग

Bhagavad Gita 1.7

मूल श्लोक :

अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

हे द्विजोत्तम हमारे पक्षमें भी जो मुख्य हैं? उनपर भी आप ध्यान दीजिये। आपको याद दिलानेके लिये मेरी सेनाके जो नायक हैं? उनको मैं कहता हूँ।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

द्रोणाचार्य को द्विजोत्तम कहकर सम्बोधित करते हुये दुर्योधन अपनी सेना के प्रमुख वीर योद्धाओं के नाम सुनाता है। एक कायर मनुष्य अंधेरे में अनुभव होने वाले भय को दूर करने के लिये सीटी बजाता है अथवा कुछ गुनगुनाने लगता है। दुर्योधन की स्थिति भी कुछ इसी प्रकार की थी। अपराधबोध से पीड़ित अत्याचारी दुर्योधन की मनस्थिति बिखर रही थी। यद्यपि उसकी सेना सक्षम शूरवीरों से सुसज्जित थी तथापि शत्रुपक्ष के वीरों को देखकर उसे भय लग रहा था। अत द्रोणाचार्य के मुख से स्वयं को प्रोत्साहित करने वाले शब्दों को वह सुनना चाहता था। परन्तु जब वह आचार्य के पास पहुँचा तब वे शान्त और मौन रहे। इसलिये टूटत्ो उत्साह को फिर से जुटाने के लिये वह अपनी सेना के प्रमुख योद्धाओं के नाम गिनाने लगता है।यह स्वाभाविक है कि अपराधबोध के भार से दबा हुआ व्यक्ति नैतिक बल के अभाव में सम्भाषणादि की मर्यादा को भूलकर अत्यधिक बोलने लगता है। ऐसे मानसिक तनाव के समय व्यक्ति के वास्तविक संस्कार उजागर होते हैं। यहाँ दुर्योधन अपने गुरु को द्विजोत्तम कहकर सम्बोधित करता है। आन्तरिक ज्ञान के विकास के कारण ब्राह्मण को द्विज (दो बार जन्मा हुआ) कहा जाता है। माता के गर्भ से जन्म लेने पर मनुष्य संस्कारहीन होने के कारण पशुतुल्य ही होता है। संस्कार एवं अध्ययन के द्वारा वह एक शिक्षित व सुसंस्कृत पुरुष बनता है। यह उसका दूसरा जन्म माना जाता है। यह द्विज शब्द का अर्थ है। द्रोणाचार्य ब्राह्मण कुल में जन्में थे और स्वभावत उनमें हृदय की कोमलता आदि श्रेष्ठ गुण थे। पाण्डव सैन्य में उनके प्रिय शिष्य ही उपस्थित थे। यह सब जानकर चतुर किन्तु निर्लज्ज दुर्योधन को अपने गुरु की निष्पक्षता पर भी संदेह होने लगा था। जब हमारे उद्देश्य पापपूर्ण और कुटिलता से भरे होते हैं तब हम अपने समीपस्थ और अधीनस्थ लोगों में भी उन्हीं अवगुणों की कल्पना करने लगते हैं।

English Translation By Swami Sivananda

"Know also, O best among the twice-born! the names of those
who are the most distinguished amongst ourselves, the leaders of my army;
these I name to thee for thy information.

Transliteration

asmākaṃ tu viśiṣṭā ye tānnibodha dvijottama
nāyakā mama sainyasya saṃjñārthaṃ tānbravīmi te

अनुवाद

हे ब्राह्मण श्रेष्ठ! हमारे पक्ष में जो प्रमुख योद्धा हैं, उन्हें भी आप जान लीजिए। मेरी सेना के जो सेनापति हैं, आपकी जानकारी के लिए मैं उनके नाम आपको बताता हूँ।

भावार्थ

दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य का ध्यान अपनी सेना के प्रमुख योद्धाओं की ओर आकर्षित कर रहा है। पांडवों की सेना का वर्णन करने के बाद, वह अपनी सेना की शक्ति का बखान करना चाहता है। इसका मुख्य उद्देश्य गुरु द्रोणाचार्य को अपनी सेना की मजबूती का अहसास कराना और उनका उत्साह बढ़ाना है।

Translation

O best of Brahmanas, know also those who are the principal warriors on our side. For your information, I shall tell you the commanders of my army.

Meaning

Duryodhana now draws the attention of his teacher, Dronacharya, to the principal warriors of his own army. After describing the Pandava forces, he wants to highlight the strength of his own side. His intention is to reassure Dronacharya of their military might and to boost the morale of his commanders.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
अस्माकम्हमारे
तुकिन्तु
विशिष्टाःप्रमुख
येजो
तान्उनको
निबोधजान लीजिए
द्विजोत्तमहे ब्राह्मण श्रेष्ठ
नायकाःसेनापति
मममेरी
सैन्यस्यसेना के
संज्ञार्थम्जानकारी के लिए
तान्उन्हें
ब्रवीमिबताता हूँ
तेआपको

Word by word

WordMeaning
asmākamour
tubut
viśiṣṭāḥprincipal
yewho
tānthem
nibodhaknow
dvijottamaO best of Brahmanas
nāyakāḥcommanders
mamamy
sainyasyaof the army
saṃjñārthamfor information
tānthem
bravīmiI tell
teto you