Chapter 1 · अर्जुनविषादयोग
Bhagavad Gita 1.25
मूल श्लोक :
भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्
उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनितिHindi Translation By Swami Ramsukhdas
सञ्जय बोले हे भरतवंशी राजन् निद्राविजयी अर्जुनके द्वारा इस तरह कहनेपर अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्णने दोनों सेनाओंके मध्यभागमें पितामह भीष्म और आचार्य द्रोणके सामने तथा सम्पूर्ण राजाओंके सामने श्रेष्ठ रथको खड़ा करके इस तरह कहा कि हे पार्थ इन इकट्ठे हुए कुरुवंशियोंको देख।
Hindi Commentary By Swami Chinmayananda
भगवान् श्रीकृष्ण ने उस भव्य रथ को भीष्म और द्रोण दोनों के सम्मुख एक स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया। एक कर्तव्यनिष्ठ सारथि के समान वे अर्जुन से कहते हैं हे पार्थ यहाँ एकत्र हुए इन कौरवों को देखो। सम्पूर्ण प्रथम अध्याय में केवल ये ही शब्द हैं जिन्हें भगवान ने कहा है। उन शब्दों ने उस चिनगारी का काम किया जिसने अर्जुन के अहंकार पर आधारित झूठे मूल्यों एवं धारणाओं के महल को जलाकर राख कर दिया। इसके पश्चात् हम देखेंगे कि इन शब्दों की अर्जुन पर क्या प्रतिक्रिया हुई और किस प्रकार उसका मन टूटकर बिखर गया।पार्थ का अर्थ है पृथापुत्र अर्जुन। पृथा कुन्ती का दूसरा नाम है। इस संस्कृत शब्द पार्थ में पार्थिव की गन्ध मिलती है जिसका अर्थ हैमृत्तिका निर्मित। यह सम्बोधन अत्यन्त अर्थपूर्ण है। इसका तात्पर्य यह है कि गीता सत्य का संदेश है जिसे अमृत स्वरूप भगवान् ने मनुष्य के सार्वकालिक प्रतिनिधि र्मत्य पुरुष अर्जुन को सुनाया है।
English Translation By Swami Sivananda
In front of Bhishma and Drona, and all the rulers of the
earth, said: "O Arjuna (son of Pritha), behold these Kurus gathered together."
Transliteration
bhīṣmadroṇapramukhataḥ sarveṣāṃ ca mahīkṣitām
uvāca pārtha paśyaitānsamavetānkurūnitiअनुवाद
भीष्म, द्रोण तथा पृथ्वी के अन्य सभी राजाओं के सामने, उन्होंने (श्रीकृष्ण ने) कहा: “हे पार्थ! यहाँ एकत्र हुए इन कुरुवंशियों को देखो।”
भावार्थ
इस श्लोक में संजय वर्णन करते हैं कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण रथ को पितामह भीष्म, द्रोणाचार्य और अन्य सभी राजाओं के ठीक सामने खड़ा कर देते हैं। अर्जुन को “एकत्र हुए कुरुवंशियों” को देखने के लिए कहकर, श्रीकृष्ण जानबूझकर उसके भीतर छिपे पारिवारिक मोह को जगाते हैं। रथ का यह स्थान अर्जुन के आगामी नैतिक संकट और विषाद की पृष्ठभूमि तैयार करता है।
Translation
In the presence of Bhishma, Drona, and all the other kings of the earth, He (Krishna) said: “O Partha, behold these assembled Kurus.”
Meaning
In this verse, Sanjaya describes how Lord Krishna positions the chariot right in front of the most revered elders, Bhishma and Drona. By asking Arjuna to look at the “assembled Kurus,” Krishna subtly awakens Arjuna’s familial attachments. This strategic placement sets the stage for Arjuna’s impending moral dilemma and emotional breakdown.
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| भीष्म | भीष्म |
| द्रोण | द्रोण |
| प्रमुखतः | के सामने |
| सर्वेषाम् | सभी |
| च | तथा |
| महीक्षिताम् | राजाओं के |
| उवाच | कहा |
| पार्थ | हे पार्थ |
| पश्य | देखो |
| एतान् | इन |
| समवेतान् | एकत्र हुए |
| कुरून् | कुरुओं को |
| इति | इस प्रकार |
Word by word
| Word | Meaning |
|---|---|
| bhīṣma | Bhishma |
| droṇa | Drona |
| pramukhataḥ | in front of |
| sarveṣām | all |
| ca | and |
| mahīkṣitām | of the kings of the earth |
| uvāca | said |
| pārtha | O Partha |
| paśya | behold |
| etān | these |
| samavetān | assembled |
| kurūn | Kurus |
| iti | thus |