श्रीमद् भगवद्गीता

Chapter 1 · अर्जुनविषादयोग

Bhagavad Gita 1.12

मूल श्लोक :

तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्

Hindi Translation By Swami Ramsukhdas

दुर्योधनके हृदयमें हर्ष उत्पन्न करते हुए कुरुवृद्ध प्रभावशाली पितामह भीष्मने सिंहके समान गरजकर जोरसे शंख बजाया।

Hindi Commentary By Swami Chinmayananda

दुर्योधन की मूर्खतापूर्ण वाचालता के कारण उसकी सेना के योद्धाओं की स्थिति बड़ी विचित्र सी हो रही थी। उन पर भी उदासी का प्रभाव प्रकट होने लगा जिसे भीष्म वहीं निकट खड़े देख रहे थे। भीष्म पितामह ने कर्मशील द्रोणाचार्य के मौन में छिपे क्रोध को समझ लिया। उन्होंने यह जाना कि इन सबको इस मनस्थिति से बाहर निकालने की आवश्यकता है अन्यथा स्थिति को इसी प्रकार छोड़ देने पर आसन्न युद्ध के समय योद्धागण प्रभावहीन हो जायेंगे। योद्धाओं के इस मनोभाव को समझते हुये सेनापति भीष्म पितामह ने दुर्योधन के साथ सभी सैनिकों के मन में हर्ष और विश्वास की तरंगें उत्पन्न करने के लिये पूरी शक्ति से शंखनाद किया।यद्यपि भीष्माचार्य का यह शंखनाद दुर्योधन के प्रति करुणा से प्रेरित था तथापि उसका अर्थ युद्धारम्भ की घोषणा करने वाला सिद्ध हुआ जैसे कि आधुनिक युद्धों में पहली गोली चलाकर युद्ध प्ररम्भ होता है। शंख के इस सिंहनाद के साथ महाभारत के युद्ध का प्रारम्भ हुआ और इतिहास की दृष्टि से कौरव ही आक्रमणकारी सिद्ध होते हैं।

English Translation By Swami Sivananda

His glorious grandsire (Bhishma), the oldest of the Kauravas,
in order to cheer Duryodhana, now roared like a lion, and blew his conch.

Transliteration

tasya sañjanayanharṣaṃ kuruvṛddhaḥ pitāmahaḥ
siṃhanādaṃ vinadyoccaiḥ śaṅkhaṃ dadhmau pratāpavān

अनुवाद

तब कुरुवंश के वयोवृद्ध, प्रतापी पितामह (भीष्म) ने उनके (दुर्योधन के) हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए, उच्च स्वर में सिंह के समान गर्जना करके अपना शंख बजाया।

भावार्थ

दुर्योधन की घबराहट को देखकर और उसका उत्साह बढ़ाने के लिए, प्रतापी पितामह भीष्म ने एक सिंह की भांति गर्जना की। उन्होंने युद्ध के आरंभ की घोषणा करते हुए अपना शंख जोर से बजाया। उनका यह कार्य दुर्योधन के मन में हर्ष और आत्मविश्वास जगाने के लिए था।

Translation

Then, the valiant grandsire, the oldest of the Kurus, generating joy for him (Duryodhana), roared loudly like a lion and blew his conch shell.

Meaning

Seeing Duryodhana’s anxiety and attempting to boost his morale, the valiant grandsire Bhishma took charge. He roared like a lion and blew his conch shell loudly to signal the commencement of the battle. This act was meant to fill Duryodhana with joy and confidence before the war began.

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
तस्यउसके (दुर्योधन के)
संजनयन्उत्पन्न करते हुए
हर्षम्हर्ष
कुरुवृद्धःकुरुवंश के वयोवृद्ध
पितामहःपितामह (भीष्म)
सिंहनादम्सिंह की गर्जना
विनद्यगरज कर
उच्चैःजोर से
शङ्खम्शंख
दध्मौबजाया
प्रतापवान्प्रतापी

Word by word

WordMeaning
tasyahis (Duryodhana’s)
sañjanayangenerating
harṣamjoy
kuruvṛddhaḥthe oldest of the Kurus
pitāmahaḥthe grandfather (Bhishma)
siṃhanādamlion’s roar
vinadyaroaring
uccaiḥloudly
śaṅkhamconch shell
dadhmaublew
pratāpavānthe valiant